
नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना के सौ साल पूरे हो गए हैं. स्थापना दिवस के शताब्दी वर्ष (Centenary Year) में मुख्य कार्यक्रम नागपुर (Nagpur) के रेशमबाग मैदान में मुख्य कार्यक्रम आयोजित है, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ramnath Kovind) बतौर मुख्य अतिथि मौजूद हैं. संघ के विजयादशमी उत्सव की शुरुआत सरसंघचालक मोहन भागवत(Mohan Bhagwat) की शस्त्र पूजा से हुई.
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने संबोधन की शुरुआत विजयादशमी की बधाई से की. उन्होंने कहा कि मेरे जीवन में नागपुर के दो महापुरुषों का बहुत बड़ा योगदान है- डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार और बाबा साहब भीमराव आंबेडकर. पूर्व राष्ट्रपति ने डॉक्टर हेडगेवार से लेकर मोहन भागवत तक, संघ के अब तक के सफर में सरसंघचालकों के योगदान भी गिनाए.
उन्होंने कहा कि कानपुर की घाटमपुर विधानसभा सीट से बीजेपी का प्रत्याशी था, तब संघ से मेरा परिचय हुआ. जातिगत भेदभाव से रहित लोग संयोग से संघ के स्वयंसेवक और पदाधिकारी ही थे. उन्होंने कहा कि संघ में जातीय आधार पर कोई भेदभाव नहीं होता. संघ सामाजिक एकता का पक्षधर रहा है. मेरी जीवन यात्रा में स्वयंसेवकों के साथ जुड़ाव और मानवीय मूल्यों से कैसे प्रेरणा मिली, इसका उल्लेख अपनी आत्मकथा में किया है, जो इस साल के अंत तक प्रकाशित हो जाएगी.
पूर्व राष्ट्रपति ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की एक रैली का जिक्र करते हुए कहा कि तब मैं बीजेपी अनुसूचित जाति मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष था. उन्होंने कहा कि अटलजी ने कहा था कि हमारी सरकार मनुस्मृति से नहीं, आंबेडकर स्मृति से चलती है. रामनाथ कोविंद ने डॉक्टर आंबेडकर और संघ के चिंतन में समानता गिनाई और कहा कि महिलाएं हमारी परिवार व्यवस्था में बराबर की सहभागी हैं. आज से वर्षों पूर्व संघ ने राष्ट्रीय सेविका वाहिनी की स्थापना की थी.
उन्होंने राजमाता विजयाराजे सिंधिया से सुषमा स्वराज तक, राष्ट्रनिर्माण में योगदान देने वाली महिलाओं के नाम का उल्लेख किया और महात्मा गांधी का भी जिक्र किया. पूर्व राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि महात्मा गांधी ने दिल्ली में संघ के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ की तारीफ की थी. बाबा साहब का एक वक्तव्य केसरी में छपा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि मैं संघ को अपनेपन की दृष्टि से देखता हूं.
पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि आपकी जो भी उपलब्धियां हैं, उनमें परिवार के अलावा देश और समाज का भी बहुत बड़ा योगदान है. विकास यात्रा में जो लोग पीछे छूट गए हैं, उनको साथ लेकर आगे बढ़ना हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है. उन्होंने देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें.
इससे पहले, संघ प्रमुख मोहन भागवत और इस आयोजन के मुख्य अतिथि रामनाथ कोविंद ने संघ संस्थापक डॉक्टर हेडगेवार की प्रतिमा के समक्ष श्रद्धा सुमन अर्पित किए. संघ प्रमुख और मुख्य अतिथि ने संघ की प्रार्थना भी की. इस मौके पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी समेत कई नेता मौजूद हैं.
सरसंघचालक मोहन भागवत ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का स्वागत किया. संघ के विजयादशमी उत्सव में 21 हजार स्वयंसेवक शामिल हो रहे हैं. इस आयोजन के साथ ही संघ की स्थापना के सौ साल पूरे होने पर वर्षभर चलने वाले आयोजनों की शुरुआत हो गई है. संघ ने इन कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की हुई है.
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