
– डॉ. मयंक चतुर्वेदी
मध्यप्रदेश आज एक ऐसे परिवर्तनकारी दौर से गुजर रहा है, जहाँ विकास नारा न होकर धरातल पर उतरती हुई वास्तविकता बन चुका है। राज्य की आर्थिक गति, औद्योगिक विस्तार, कृषि समृद्धि और रोजगार सृजन की दिशा में हो रहे सतत प्रयासों ने इसे देश के तेजी से उभरते राज्यों की श्रेणी में खड़ा कर दिया है। इस परिवर्तन के केंद्र में हैं डॉ. मोहन यादव, जिनके नेतृत्व में मध्यप्रदेश आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सशक्त बनने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्पष्ट मानना है कि राज्य का विकास देश के समग्र विकास से जुड़ा हुआ है। वे अक्सर कहते हैं कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत नई ऊँचाइयों को छू रहा है और इसी दिशा में मध्यप्रदेश भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है। विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए राज्य ने एक व्यापक दृष्टिपत्र तैयार किया है, जिसमें आने वाले 25 वर्षों में प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का संकल्प लिया गया है।
आर्थिक विकास की नई कहानी
पिछले कुछ वर्षों में एक तरह से देखें तो जिस गति से आर्थिक प्रगति की है, वह प्रेरणादायक है। प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय वर्तमान में लगभग 1 लाख 55 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है, जिसे अगले 25 वर्षों में 22 लाख 50 हजार रुपये तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसे व्यापक औद्योगिक निवेश, कृषि उत्पादन और सेवा क्षेत्र के विस्तार से हासिल किया जाएगा।
राज्य सरकार ने औद्योगिक निवेश को आकर्षित करने के लिए 18 नई औद्योगिक नीतियां लागू की हैं। इन नीतियों का उद्देश्य बड़े शहरों के साथ ही छोटे और दूरस्थ क्षेत्रों तक उद्योगों को पहुँचाना है। इसके लिए संभागीय स्तर पर अलग-अलग सेक्टरों पर केंद्रित रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित किए जा रहे हैं, जिनका सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगा है।
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रोजगार सृजन और युवाओं में नया उत्साह
मप्र में तेजी से बढ़ते उद्योगों और निवेश के कारण रोजगार के नए अवसर लगातार पैदा हो रहे हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का युवा रोजगार देने वाला बने। इसी उद्देश्य से स्वरोजगार और युवा उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं। यही कारण है कि वर्तमान में प्रदेश की बेरोजगारी दर मात्र 1 से 1.5 प्रतिशत के बीच रह गई है, जोकि देश के कई राज्यों की तुलना में काफी कम है। इसका सीधा संबंध उद्योगों के विस्तार, एमएसएमई सेक्टर की मजबूती और कृषि आधारित रोजगार से है।
वस्तुत: यहां देखने में यह भी आ रहा है, जैसा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्पष्ट मानना भी है कि एमएसएमई क्षेत्र राज्य के औद्योगिक विकास की बैकबोन है। छोटे और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देकर ही व्यापक स्तर पर रोजगार सृजित किया जा सकता है। यही कारण है कि राज्य सरकार एमएसएमई और लघु उद्योगों को विशेष अनुदान, कर में रियायत और आसान ऋण सुविधा उपलब्ध करा रही है। औद्योगिकरण को विशेष रूप से जनजाति और पिछड़े क्षेत्रों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। कटनी और शहडोल जैसे क्षेत्रों में माइनिंग सेक्टर में निवेश बढ़ा है, वहीं नर्मदापुरम के बाबई-मोहासा क्षेत्र में इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट्स के निर्माण के लिए औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है।
यही कारण है कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में मिले लगभग 30 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों में से करीब 8 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि निवेशकों का भरोसा मध्यप्रदेश की नीतियों और वातावरण पर लगातार बढ़ रहा है।
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती
मध्यप्रदेश लंबे समय से कृषि क्षेत्र में अग्रणी रहा है और सरकार इसे और सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। कृषक कल्याण वर्ष के तहत किसानों को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने का संकल्प लिया गया है। कृषि उत्पादन के साथ-साथ फूड प्रोसेसिंग और पशुपालन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। दूध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। सिंचाई के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। पिछले डेढ़ साल में ही 7.5 लाख हेक्टेयर सिंचाई रकबा बढ़ाया गया है और इसे 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। नर्मदा का जल क्षिप्रा नदी में पहुंचने से मालवा क्षेत्र के किसानों को विशेष लाभ मिला है।
इसके साथ ही नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी मध्यप्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य देश में तीसरे स्थान पर पहुंच चुका है। मुरैना में उत्तर प्रदेश के साथ मिलकर एक बड़ा सोलर प्रोजेक्ट स्थापित किया जा रहा है, जिससे दोनों राज्यों को बिजली का लाभ मिलेगा। किसानों को सोलर पंप देकर ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। मंदसौर के गांधी सागर बांध में पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट की स्थापना भी राज्य की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह सब प्रयास पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक विकास को भी गति दे रहे हैं।
कौशल विकास और तकनीकी सशक्तिकरण
औद्योगिक गतिविधियों के बढ़ने के साथ भविष्य में कुशल श्रमिकों की मांग भी बढ़ेगी। इसे ध्यान में रखते हुए शिक्षा नीति 2020 के तहत युवाओं के कौशल उन्नयन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इंजीनियरिंग कॉलेजों में आईटी सेंटर खोले जा रहे हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षण की व्यवस्था की जा रही है। सरकार तकनीक को चुनौती नहीं, बल्कि अवसर के रूप में देख रही है और युवाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
महिला सशक्तिकरण और सामाजिक विकास
प्रधानमंत्री मोदी की मंशा के अनुरूप महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी ठोस काम मध्यप्रदेश में मोहन सरकार के नेतृत्व में होता हुआ इन दिनों बड़े स्तर पर देखा जा सकता है। प्रदेश के एक लाख से अधिक स्वसहायता समूहों को बाजार और तकनीकी सहायता दी जा रही है। उद्योगों में महिलाओं को 48 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है और उनके लिए विशेष औद्योगिक क्षेत्र बनाए जा रहे हैं। वहीं धार्मिक पर्यटन को नई गति देने के लिए होम-स्टे जैसी योजनाओं को बढ़ावा दिया गया है। इससे एक ओर पर्यटकों को बेहतर सुविधा मिल रही है, तो दूसरी ओर ग्रामीणों को रोजगार के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं। पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि का नया मार्ग खोल रही है, महिला सशक्तिकरण की इसमें बड़ी भूमिका है।
सुरक्षा और विकास का संतुलन
राज्य ने विकास के साथ-साथ सुरक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। अमित शाह के नेतृत्व में केंद्र सरकार के सहयोग से मध्यप्रदेश नक्सलवाद से लगभग मुक्त होने वाला राज्य बन गया है। यह उपलब्धि विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में अहम भूमिका निभा रही है।
ऐसे में कहना यही होगा कि आज डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश ने यह दिखा दिया है कि सही नीतियों, स्पष्ट दृष्टि और मजबूत इच्छाशक्ति के साथ किसी भी राज्य को विकास के नए शिखर तक पहुंचाया जा सकता है। जब विदेशी कंपनियां भी यहां निवेश करने के लिए उत्साहित हैं, युवा उद्यमिता की ओर बढ़ रहे हैं और किसानों की आय बढ़ाने के प्रयास सफल हो रहे हैं, तब यही कहना होगा कि मध्यप्रदेश एक नए औद्योगिक और आर्थिक युग की दहलीज पर खड़ा है।
(लेखक केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड एडवाइजरी कमेटी के पूर्व सदस्य एवं पत्रकार हैं)
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