
उज्जैन। पिछले एक सप्ताह से लगातार हुई बारिश का असर खेतों से लेकर मंडी में आ चुकी सोयाबीन की उपज पर साफ नजर आने लगा है। समय से पहले आ चुकी सोयाबीन को नमी लगने के कारण मंडी में धूप बतानी पड़ रही है। वहीं जिन किसानों की सोयाबीन की फसल में पकने की कगार पर आ चुकी सोयाबीन की फलियां भी लगातार बारिश के कारण खराब हुई हैं। इधर लहसुन-प्याज मंडी में प्याज की आवक अभी भी अच्छी-खासी हो रही है और लंबे समय बाद किसानों को प्याज के ऊंचे दाम मिलने लगे हैं।
दीपावली से पहले इस बार मंडी में सोयाबीन की आवक शुरू हो गई थी। हालांकि मंडी में अभी भी किसान चार से पांच हजार बोरी तक नई सोयाबीन लेकर आ रहे हैं। जबकि 50 फीसदी से ज्यादा किसानों की सोयाबीन की फसल पकने की कगार पर है और खेतों में है। चिंतामन जवासिया गांव के किसान अजय पटेल ने बताया कि पिछले 8-10 दिनों से लगातार हुई बारिश ने खेतों से कट चुकी और खेतों में खड़ी उपज को नुकसान पहुंचाया है। जिन किसानों के यहां दीपावली से पहले सोयाबीन की फसल आ गई तो खलिहानों में पानी के कारण यह भीग गई और नमी आ गई। नमी वाले सोयाबीन के भाव मंडी में दो से ढाई हजार रुपए प्रति क्ंिवटल मिल रहे हैं। व्यापारी इन्हें नमी और दाग लगने का हवाला देकर कम भाव में खरीद रहे हैं। इधर मंडी प्रांगण में भीगी हुई सोयाबीन खरीद चुके व्यापारी प्रांगण में इसे फैलाकर धूप दिखा रहे हैं। किसानों का कहना है कि जो फसलें अभी खेतों में है और सोयाबीन की फलियां पकने को आ गई थी बारिश से उनमें भी नमी आ गई है और दाग लग गए हैं।
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