
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit Shah) ने मंगलवार को लोकसभा महासचिव (Lok Sabha Secretary General) उत्पल कुमार सिंह (Utpal Kumar Singh) को पत्र लिखकर सूचित किया है कि वे संसद के चल रहे मॉनसून सत्र (Monsoon session) में “केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन (संशोधन) विधेयक, 2025” पेश करना चाहते हैं। मिली जानकारी के अनुसार, शाह ने यह पत्र केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, विधि और न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग, लोकसभा सचिवालय और लोकसभा के विधायी कार्यालय को भी भेजा है। गृह मंत्री ने प्राथमिक प्रस्ताव के साथ-साथ एक “130वां संविधान संशोधन विधेयक, 2025” भी लोकसभा में लाने की योजना जताई है।
नियमों में ढील की मांग
अमित शाह ने एक अलग पत्र में लोकसभा महासचिव से अनुरोध किया है कि उन्हें दोनों संशोधन विधेयक इसी सत्र में पेश करने की अनुमति दी जाए। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि लोकसभा की प्रक्रियाओं और नियमों- खासतौर पर नियम 19 (ए) और 19 (बी) में कुछ ढील दिखाई जाए, ताकि प्रस्ताव को मौजूदा सत्र में ही पेश किया जा सके।
संसदीय नियमों के मुताबिक:
– नियम 19 (ए): सरकार के मंत्री को लोकसभा में विधेयक पेश करने के लिए पूर्व सूचना देनी होती है।
– नियम 19 (बी): किसी भी सरकारी विधेयक की प्रति लोकसभा के सभी सदस्यों को वितरित करना आवश्यक है, ताकि सदस्य उसकी समीक्षा कर सकें और तैयारी कर सकें।
गृह मंत्री ने अपने पत्र में तर्क दिया है कि “समय की कमी” के कारण नियमों में लचीलापन बरता जाए, ताकि मौजूदा मॉनसून सत्र में ही इन विधेयकों को प्रस्तुत किया जा सके। मौजूद संसद सत्र 21 अगस्त को समाप्त हो रहा है।
जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने पर हो रही चर्चा
अमित शाह ने इन विधेयकों को ऐसे समय में पेश करने की इजाजत मांगी है जब केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग हो रही है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार इस समय राज्य का दर्जा बहाल करने संबंधी कोई ठोस कदम इसमें शामिल नहीं किया गया है।
अब्दुल्ला की पोस्ट ने बढ़ाई हलचल
शाह के पत्र से जुड़ी खबर सामने आने के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ‘एक आंख से देखती हुई इमोजी’ के साथ रहस्यमयी पोस्ट की। साथ ही उन्होंने एक GiF भी शेयर की जिस पर लिखा है, “प्लीज, मैं अब और नहीं सह सकता।” उनकी पोस्ट पर की गई कमेंट्स में जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे की संभावित बहाली जैसे कयास लगाए गए। इस बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, न ही उमर अब्दुल्ला ने इस विषय पर कुछ कहा है।
हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा इस स्वतंत्रता दिवस के आसपास जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की अटकलें लगाई गई थीं। इन अटकलों का हवाला देते हुए, उमर अब्दुल्ला ने यहां बख्शी स्टेडियम में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि उन्हें ज्यादा उम्मीदें नहीं थीं, लेकिन उन्हें विश्वास दिलाया गया था कि ऐसा हो सकता है।
अब्दुल्ला ने कहा, “मुझे कोई उम्मीद नहीं थी, लेकिन मुझे लगातार बताया जा रहा था कि दस्तावेज तैयार हैं और अब सिर्फ घोषणा करनी है। लेकिन घोषणा नहीं हुई। उम्मीद की किरण धुंधली पड़ रही है, लेकिन हम हार नहीं मानेंगे।” मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में सत्ता के दो केंद्र होने की समस्या के बावजूद, उनकी सरकार ने पिछले 10 महीने में काफी काम किया है।
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