
नई दिल्ली। हिंदुस्तान (India) की सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश (UP) में बच्चों के खिलाफ गंभीर अपराधों के 67 से ज्यादा मामले लंबित हैं, जो सभी राज्यों में सबसे अधिक है। प्रदेश में लंबित मामले यौन अपराधों से बच्चों के कड़े संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत दर्ज सभी मामलों का लगभग 28 फीसदी हैं। हालांकि पीड़ित बच्चों को अदालती कार्रवाई की उत्पीड़न से बचने के लिए विशेष रूप से फास्ट ट्रैक कोर्ट (fast track court) में जल्द से जल्द मुकदमों को पूरा करने का प्रावधान है। पॉक्सो अधिनियम में बदवाल करके सरकार द्वारा फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाया गया था।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक हर जिले में कम से कम एक फास्ट ट्रैक कोर्ट है, लेकिन साल 2016 से लेकर अब तक लंबित मामलों में 170 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। साल 2016 में 90,205 लंबित मामले थे। जबकि 2023, जनवरी में ये बढ़कर 2 लाख 43 हजार 237 हो गया। वहीं महाराष्ट्र में 33,000 लंबित मामले हैं। इस सूची में पश्चिम बंगाल तीसरे नंबर पर है. जबकि बिहार चौथे,, औडिशा पांचवे और मध्यप्रदेश छठवें नंबर पर है।
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