
नई दिल्ली । ‘आई लव मोहम्मद’ विवाद गहराता जा रहा है। इसी बीच सोशल मीडिया पर AIMIM चीफ और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी (MP Asaduddin Owaisi) का एक वीडियो वायरल (Video viral) हो रहा है, जिसमें वह ‘आई लव मोहम्मद’ लिखा एक पोस्टर लेने से इनकार कर रहे हैं। दरअसल, उस पोस्टर पर इस नारे के साथ गुंबद-ए-खजरा की तस्वीर लगी थी और उस पर ओवैसी का भी फोटो लगा हुआ था। वीडियो में दिख रहा है कि एक समर्थक उन्हें यह पोस्टर भेंटकर सम्मानित कर रहे है।
ओवैसी भी उसे हंसकर कबूल करते हैं लेकिन जैसे ही उनकी नजर गुंबद-ए-खजरा और उसके बगल में छपी अपनी तस्वीर पर जाती है तो उसे वह ढकने को कहते हैं। इसके बाद भेंटकर्ता को ओवैसी की तस्वीर को हाथों से ढकते हुए देखा जा सकता है। ओवैसी ने इसे देखते हुए समर्थक से कहा, “कहां गुंबद-ए-खजरा और कहां मैं।” इसके आगे ओवैसी ने कहा कि इसे आपलोग अपने पास ही रखिए। उन्होंने वह सम्मान लौटा दिया। अब सवाल उठता है कि आखिर ये गुंबद क्या है और ओवैसी ने सम्मान क्यों वापस किया?
गुंबद-ए-खजरा क्या है?
गुंबद-ए-खजरा इस्लाम धर्म में एक पवित्र प्रतीक है। यह सऊदी अरब के शहर मदीना में स्थित मस्जिद-ए-नबवी (पैगंबर की मस्जिद) का गुंबद है। हरे रंग का यह गुंबद पैगंबर मुहम्मद और उनके दो साथियों (पहले खलीफा अबू बक्र और दूसरे खलीफा उमर) के मकबरों के ऊपर बना हुआ है। यह मस्जिद-ए-नबवी के अंदर एक महत्वपूर्ण संरचना है। इसे ‘हरा गुंबद’ के रूप में जाना जाता है। हरा रंग यानी (खजरा) के कारण ही गुंबद का नाम गुंबद-ए-खजरा पड़ा है।
कब- कब बदला गुंबद का रंग?
इसे मूल रूप से लकड़ी का बताया जाता है और समय-समय पर इसकी मरम्मत की जाती रही है। हर साल लाखों लोग इसका दर्शन करने पहुंचते हैं। मक्का की तीर्थयात्रा के बाद इसका दर्शन करने की इस्लाम में परंपरा है। इस संरचना 1279 ई.पू.की है। शुरुआत में गुंबद का रंग पीला था। बाद में 15वीं शताब्दी के अंत में दो बार और 1817 में एक बार इसे नीले रंग और चांदी का उपयोग कर सफेद कर दिया गया। तब इसे सफेद गुंबद कहा जाने लगा था। 1818 में इसे फिर से बनाया गया और गुंबद का रंग हरा कर दिया गया। तब इसे अल-क़ब्ता अल-खदरा अर्थात ‘ग्रीन डोम’ या गुंबद-ए-खजरा के नाम से जाना जाने लगा। तब से इसे किसी ने नहीं बदला है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved