मुंबई। भारतीय जनता पार्टी (BJP) मुंबई में अपना पहला महापौर बनाने जा रही है। इसके साथ ही बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में ठाकरे परिवार के 25 साल के वर्चस्व का अंत होना तय माना जा रहा है। भाजपा की पार्षद रितु तावड़े (Ritu Tawde) ने शनिवार को महापौर पद के लिए नामांकन दाखिल किया। उनके खिलाफ किसी अन्य उम्मीदवार ने नामांकन नहीं किया, जिससे उनका निर्विरोध महापौर चुना जाना तय हो गया है।
महायुति में भाजपा की सहयोगी पार्टी शिवसेना (शिंदे गुट) ने संजय घाडी को उपमहापौर पद के लिए उम्मीदवार घोषित किया है। तावड़े और घाडी ने मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, भाजपा मुंबई अध्यक्ष अमित साटम, पूर्व शिवसेना सांसद राहुल शेवाले समेत महायुति के कई नेताओं की मौजूदगी में महानगरपालिका सचिव कार्यालय में नामांकन दाखिल किया।
बीएमसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नामांकन की समय सीमा खत्म होने तक महापौर पद के लिए केवल रितु तावड़े और उपमहापौर पद के लिए संजय घाडी का ही नामांकन प्राप्त हुआ है। विपक्षी दलों ने कोई नामांकन दाखिल नहीं किया है। इसके बावजूद तय प्रक्रिया के तहत 11 फरवरी को चुनावी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।
15 महीने का होगा उपमहापौर का कार्यकाल
शिवसेना सचिव संजय मोरे ने बताया कि वार्ड नंबर 5 के पार्षद संजय घाडी 15 महीने तक उपमहापौर के रूप में काम करेंगे। घाडी पहले शिवसेना (उबाठा) के वरिष्ठ पार्षद रहे हैं और बाद में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हुए। शिवसेना उपमहापौर का कार्यकाल बांटकर अपने अन्य पार्षदों को भी मौका देना चाहती है।
रितु तावड़े का राजनीतिक सफर
रितु तावड़े ने वर्ष 2012 में भाजपा जॉइन की और उसी साल पार्षद चुनी गईं। अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने शिक्षा समिति की अध्यक्षता की और शिक्षा, बुनियादी ढांचा, पानी की आपूर्ति व सार्वजनिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई। घाटकोपर पूर्व (वार्ड 132) से दो बार पार्षद रह चुकीं तावड़े, दुकानों में पुतलों पर आपत्तिजनक कपड़ों के मुद्दे को उठाने को लेकर भी सुर्खियों में रही हैं।
भाजपा ने किया बड़ा दावा
भाजपा मुंबई अध्यक्ष अमित साटम ने कहा कि मुंबई को 44 साल बाद भाजपा का महापौर मिलने जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि महायुति बीएमसी को भ्रष्टाचार से मुक्त कराएगी।
साटम ने कहा कि गठबंधन के पास 118 पार्षदों का समर्थन है, जो बहुमत के आंकड़े 114 से अधिक है। उन्होंने यह भी दोहराया कि महायुति ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि मुंबई को मराठी और हिंदू महापौर मिलेगा।
बीएमसी में बदलेगा सत्ता संतुलन
1997 से बीएमसी पर शासन कर रही शिवसेना (उबाठा) को इस बार 65 सीटों पर संतोष करना पड़ा। भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि शिवसेना (शिंदे गुट) ने 29 सीटें जीतीं।
कांग्रेस को 24, एआईएमआईएम को 8, मनसे को 6, राकांपा (अजित पवार गुट) को 3 और समाजवादी पार्टी को 2 सीटें मिलीं। दो निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनाव जीतने में सफल रहे।
गौरतलब है कि बीएमसी का पिछला कार्यकाल समाप्त होने के बाद 7 मार्च 2022 से प्रशासक शासन लागू है। देश के सबसे अमीर नगर निकायों में शामिल बीएमसी का 2025-26 का बजट 74,450 करोड़ रुपये तय किया गया है, जो कई राज्यों के बजट से भी अधिक है।
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