
नई दिल्ली । महाराष्ट्र(Maharashtra) में मस्जिदों में अजान(Azan in mosques) के लिए लगाए गए लाउडस्पीकर(Loudspeaker) हटाए जाने के खिलाफ मुस्लिम पक्षों (Muslim sides)ने हाईकोर्ट(High Court) का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले पर अब बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जवाब मांगा है। जस्टिस रवींद्र वी घुगे और जस्टिस एमएम सत्ये की पीठ ने महाराष्ट्र सरकार और अन्य को नोटिस जारी किया कर कोर्ट को 9 जुलाई तक अपना जवाब देने को कहा है।
इससे पहले मुंबई में कई मस्जिदों, दरगाहों और धार्मिक स्थलों का प्रबंधन करने वाली अंजुमन इत्तेहाद ओ तरक्की मदीना जामा मस्जिद और अन्य द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस की कार्रवाई मनमानी थी और मुस्लिम संस्थानों को टारगेट किया जा रहा है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि इस साल अप्रैल से ही पुलिस ने मनमाने तरीके से एक्शन लिया है।
याचिका में क्या?
याचिका के मुताबिक ध्वनि प्रदूषण नियम 2000 के कथित उल्लंघन का हवाला देते हुए कई मस्जिदों और दरगाहों को नोटिस जारी किए गए थे। हालांकि नोटिस में उल्लंघन को लेकर कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई थी। याचिका में दावा किया गया है कि पुलिस मस्जिदों और दरगाहों को चुनिंदा तरीके से निशाना बना रही है और इससे इबादत करने वाले लोग प्रभावित हो रहे हैं।
लाउडस्पीकर का इस्तेमाल जरूरी- मुस्लिम पक्ष
याचिका में आरोप लगाया गया है, “पुलिस की पूरी कार्रवाई मुस्लिम समुदाय के खिलाफ है और भेदभाव का नतीजा है। यह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।” याचिका में आरोप लगाया गया कि पुलिस निहित राजनीतिक हितों के इशारे पर काम कर रही है। याचिका में यह भी कहा गया है कि ‘अजान’ इस्लाम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और मुंबई जैसे शहर में लोगों को नमाज के लिए बुलाने के लिए लाउडस्पीकर का इस्तेमाल जरूरी है।
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