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आम जनता की जरूरतों और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की अनदेखी की गई बजट में

February 01, 2026


लखनऊ । आम जनता की जरूरतों और दैनिक उपयोग की वस्तुओं (Needs of Common People and items of Daily Use) की बजट में अनदेखी की गई (Were ignored in the Budget) । ट्रांस गोमती की आदर्श व्यापार मंडल की महिला अध्यक्ष ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर इस बार खास ध्यान नहीं दिया गया है, जबकि महिलाओं के लिए ये चीजें बेहद महत्वपूर्ण होती हैं।

  • उन्होंने कहा कि गैस सिलेंडर और ग्रोसरी जैसी आवश्यक वस्तुओं को लेकर बजट केंद्रित नहीं रहा। इसके साथ ही बच्चों की शिक्षा को लेकर भी कोई बड़ी या ठोस घोषणा नहीं की गई। उन्होंने यह जरूर माना कि स्वास्थ्य के लिहाज से बजट में कुछ हद तक राहत देखने को मिली है। महिला व्यापारी ने कहा कि एक महिला होने के नाते उन्हें इस बजट में कुछ खास नजर नहीं आया। उनका मानना है कि यह बजट आम जनता की जरूरतों से ज्यादा सरकार के हितों को ध्यान में रखकर बनाया गया प्रतीत होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि आने वाले चुनावों को देखते हुए बजट की रूपरेखा तैयार की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि गैस सिलेंडर और सोने-चांदी की कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिल रहा है, लेकिन इन जरूरी वस्तुओं पर बजट में कोई विशेष राहत नहीं दी गई है।

    आम बजट को लेकर उत्तर प्रदेश के व्यापारियों का कहना है कि इस बार का बजट उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया है। इसमें न तो आम जनता की जरूरतों को प्राथमिकता दी गई है और न ही व्यापारियों को कोई ठोस राहत दी गई है। उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल की सर्राफा बाजार इकाई के प्रभारी क्षितिज अवस्थी ने बताया कि व्यापारी वर्ग ने बड़े उत्साह के साथ बजट को सुना था, लेकिन अंत में उन्हें निराशा ही हाथ लगी। उन्होंने कहा कि इस बजट के जरिए व्यापारियों और आम जनता दोनों के साथ छलावा हुआ है। व्यापारियों को उम्मीद थी कि इंपोर्ट ड्यूटी या जीएसटी में कटौती की जाएगी, जिससे व्यापार को कुछ राहत मिलेगी, लेकिन इस दिशा में कोई घोषणा नहीं की गई। इसके अलावा एमएसएमई सेक्टर को लेकर भी किसी तरह की राहत भरी घोषणा नहीं हुई।

    एक अन्य व्यापारी ने कहा कि पहले यह माना जा रहा था कि यह बजट ऐतिहासिक साबित होगा, क्योंकि आयकर नियम 1961 में वर्ष 2025 में संशोधन किया गया है और 64 साल बाद नया कानून अस्तित्व में आया है। ऐसे में उम्मीद थी कि इस बार के बजट में कई अहम बातें स्पष्ट होंगी और व्यापार जगत को लाभ मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। व्यापारी ने सरकार से मांग की कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान दिया जाना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की जरूरत है और सरकारी अस्पतालों को हाईटेक बनाया जाना चाहिए। उनका मानना है कि अगर देश के नागरिक शिक्षित और स्वस्थ होंगे, तभी देश प्रगति की राह पर आगे बढ़ सकेगा। उन्होंने सरकार द्वारा दिए जा रहे 5 किलो मुफ्त राशन पर भी सवाल उठाया और कहा कि इस योजना पर सालाना करीब 8 हजार करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। उनका कहना है कि इस योजना को बंद कर यह राशि शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश की जानी चाहिए, ताकि जनता आत्मनिर्भर बन सके और देश का समग्र विकास हो सके।

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