
नई दिल्ली : बॉलीवुड की जानी मानी और बेबाक अभिनेत्री नीना गुप्ता (Actress Neena Gupta )ने एक बार फिर अपने करियर के शुरुआती दिनों का ऐसा अनुभव साझा किया है जो फिल्म इंडस्ट्री (film industry)के उस दौर की सच्चाई को सामने लाता है जब कलाकारों को अपनी मजबूरियों के आगे चुप रहना पड़ता था। नीना गुप्ता ने बताया कि अपने करियर की शुरुआत में उन्होंने कई ऐसे हालात झेले जिनका असर आज भी उनके मन पर है। उन्होंने याद किया कि एक फिल्म की शूटिंग के दौरान एक निर्देशक (including actors and a director)ने बिना किसी गलती के उन्हें सबके सामने अपमानित किया औरinsulted and abused in front of the entire गालियां दीं ।
नीना गुप्ता के अनुसार उस फिल्म में उनका रोल बेहद छोटा था और संवाद भी गिने चुने थे। इसके बावजूद निर्देशक ने अपने निजी गुस्से का निशाना उन्हें बना लिया। सेट पर मौजूद कई लोगों के सामने यह सब हुआ और वह कुछ कह भी नहीं सकीं। उनकी आंखों से आंसू बह रहे थे लेकिन हालात ऐसे थे कि विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा पाईं। उस समय उनके पास काम की बेहद जरूरत थी और आमदनी का कोई दूसरा साधन नहीं था।
अभिनेत्री ने कहा कि उस दौर में कलाकार खासकर महिलाएं बहुत कुछ सहन करती थीं। अगर काम छोड़ देतीं तो अगला मौका मिलना मुश्किल हो जाता था। उन्होंने स्वीकार किया कि अगर कोई दूसरा विकल्प होता तो वह उस प्रोजेक्ट का हिस्सा कभी न बनतीं। लेकिन जिम्मेदारियों और जरूरतों ने उन्हें वहीं टिके रहने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने खुद को संभाला और काम पूरा किया।
नीना गुप्ता ने यह भी बताया कि उन्होंने अपने करियर में कई ऐसी फिल्में साइन कीं जिनके लिए उन्हें आज भी अफसोस होता है। वह घर लौटकर भगवान से प्रार्थना करती थीं कि वह फिल्म रिलीज न हो। उन्होंने एक फिल्म का उदाहरण देते हुए कहा कि उसमें उनका किरदार केवल एक गैंग की सदस्य तक सीमित था और कहानी में उनका कोई महत्व नहीं था। फिर भी उस समय काम मिलना ही सबसे बड़ी बात हुआ करती थी।
समय के साथ हालात बदले लेकिन यह सफर आसान नहीं था। नीना गुप्ता ने लंबे समय तक अच्छे किरदारों के लिए इंतजार किया। एक वक्त ऐसा भी आया जब उनके पास बिल्कुल काम नहीं था। उन्होंने हिम्मत जुटाकर सोशल मीडिया का सहारा लिया और इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट डालकर काम मांगा। वह पोस्ट चर्चा में आई और उसके बाद उनके करियर को नई दिशा मिली।
साठ साल की उम्र के बाद फिल्म बधाई हो ने नीना गुप्ता को नई पहचान दिलाई। इस फिल्म के बाद उन्हें मजबूत और सम्मानजनक किरदार मिलने लगे। आज वह इंडस्ट्री की उन चुनिंदा अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं जो न सिर्फ अभिनय के लिए बल्कि अपनी ईमानदार बातों के लिए भी जानी जाती हैं।
नीना गुप्ता का यह अनुभव न सिर्फ उनके संघर्ष को दिखाता है बल्कि उस दौर की हकीकत भी बयान करता है जब कलाकारों को अपने आत्मसम्मान और जरूरतों के बीच चुनाव करना पड़ता था। उनकी कहानी आज की पीढ़ी के कलाकारों के लिए एक सबक भी है और प्रेरणा भी कि हालात चाहे जैसे हों सच और साहस का रास्ता कभी कमजोर नहीं पड़ता।

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