
नई दिल्ली। एक बेहद संवेदनशील और झकझोर देने वाले मामले में अदालत ने एक दंपति (Couple) को अपनी ही बेटी (Daughter) की अनदेखी कर उसे मौत के मुंह में धकेलने का दोषी ठहराते हुए 8-8 साल की सजा सुनाई है। 32 वर्षीय स्टेफी डेविस (Steffie Davis) का शव उनके घर से अत्यंत खराब हालत में बरामद हुआ, जिसे देखकर मेडिकल टीम भी स्तब्ध रह गई।
जांच में सामने आया कि स्टेफी लंबे समय से बिस्तर पर पड़ी थी और उसे किसी तरह की चिकित्सा या देखभाल नहीं मिल रही थी। जब पैरामेडिक्स मौके पर पहुंचे, तो उसका शरीर बेहद कमजोर और कंकाल जैसा हो चुका था। शरीर पर गंभीर संक्रमण वाले घाव थे और हालात बेहद अस्वच्छ थे। डॉक्टरों के अनुसार, उसकी मौत सेप्सिस और अत्यधिक कुपोषण के कारण हुई।
मामले की सुनवाई के दौरान माता-पिता के बयानों पर भी सवाल उठे। मां ने दावा किया कि उसने बेटी से मौत से कुछ समय पहले बातचीत की थी, लेकिन जांच में यह दावा गलत साबित हुआ। अदालत ने माना कि स्टेफी की मृत्यु कई दिन पहले ही हो चुकी थी। मोबाइल संदेशों से भी यह स्पष्ट हुआ कि वह लंबे समय से असहाय स्थिति में मदद की गुहार लगा रही थी, लेकिन उसकी अनदेखी की गई।
पड़ोसियों के अनुसार, घर का माहौल भी ठीक नहीं था और लड़की को अक्सर अपमानित किया जाता था। सबूतों से यह भी सामने आया कि उसे समाज से पूरी तरह अलग-थलग कर दिया गया था। डॉक्टरों का मानना है कि यदि समय पर इलाज और देखभाल मिलती, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी।
अदालत ने इस पूरे मामले को गंभीर लापरवाही करार देते हुए कहा कि माता-पिता ने अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह असफलता दिखाई। वहीं बचाव पक्ष ने दलील दी कि मां मानसिक दबाव में थी और पिता ने खुद को असफल अभिभावक माना, लेकिन कोर्ट ने इन तर्कों को खारिज करते हुए सख्त सजा सुनाई।
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