
उज्जैन। कल शाम मावठे की बारिश हुई थी। इसमें शहर के साथ-साथ मंडी प्रांगण भी तरबतर हो गया था। परिसर में कई व्यापारियों ने खुले में गेहूँ रख रखा था जो बारिश में भीग गया। कृषि उपज मंडी में व्यापारी रोजाना नीलामी में किसानों से उपज खरीदते हैं। कई दिनों तक यह उपज मंडी की फड़ वाली शेड या खुले में रखी जाती है। व्यापारी ने अपने गोडाऊन में रखने की बजाए बाहर के बाहर ही बेचने की फिराक में रहते हैं। कल दोपहर 3 बजे बाद अचानक बादल छाये और मावठे की बारिश होने लगी थी। इस बारिश ने मंडी के कुछ व्यापारियों का खुले में रखा गेहूँ और अन्य उपज भिगो दी। मंडी में अभी भी नये शेड की दरकार है। इसका प्रस्ताव भी मंडी समिति ने बनाकर कुछ साल पहले दिया था। मंडी को स्मार्ट मंडी बनाने की कवायद भी चल रही है लेकिन मंडी में अभी अव्यवस्थाएँ हैं। जरा सी बारिश में यहाँ सड़कों पर पानी जमा हो जाता है। इस कारण मंडी प्रांगण में रखे खुले अनाज के ढेर भीग जाते हैं।
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