
डेस्क। एशियाई क्षेत्र में एक बार फिर तनाव गहरा गया है। पहले से ही दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के बीच चल रहे राजनीतिक और सैन्य तनाव के बीच उत्तर कोरिया ने मंगलवार को अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए बड़ा कदम उठाया। उत्तर कोरिया ने अपनी पूर्वी समुद्री सीमा की ओर कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिसकी पुष्टि दक्षिण कोरिया और जापान ने की है। यह मिसाइल प्रक्षेपण ऐसे वक्त पर हुआ है, जब उत्तर कोरिया में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बैठक होने वाली है और क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी हुई है।
ऐसे में इस कदम को न सिर्फ एक सैन्य अभ्यास, बल्कि पड़ोसी देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक कड़े संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। दक्षिण कोरिया की सेना के मुताबिक, उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग के उत्तर-पूर्वी इलाके से कई बैलिस्टिक मिसाइलें छोड़ी गईं, जो करीब 350 किलोमीटर तक उड़ान भरने के बाद समुद्र में जा गिरीं। वहीं, जापान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उत्तर कोरिया द्वारा दागी गई दो मिसाइलें कोरियाई प्रायद्वीप के पूर्वी तट के पास समुद्र में गिरीं।
जापान ने इस मिसाइल परीक्षणों की कड़ी निंदा की। साथ ही बयान जारी करते हुए कहा कि यह कदम जापान, क्षेत्रीय शांति और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए गंभीर खतरा है। दक्षिण कोरिया की सेना ने भी कहा है कि वह उत्तर कोरिया की किसी भी उकसावे वाली कार्रवाई से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। बता दें कि यह मिसाइल प्रक्षेपण ऐसे समय हुआ है, जब उत्तर कोरिया ने जनवरी की शुरुआत में कथित हाइपरसोनिक मिसाइलों का परीक्षण किया था।
इससे पहले दिसंबर में उसने लंबी दूरी की रणनीतिक क्रूज मिसाइलों और नए एंटी-एयर मिसाइल सिस्टम का परीक्षण किया था। इसके अलावा, उत्तर कोरिया ने अपनी पहली परमाणु-संचालित पनडुब्बी के निर्माण से जुड़ी तस्वीरें भी जारी की थीं।
मामले में विशेषज्ञों के मुताबिक, 2019 में अमेरिका और दक्षिण कोरिया के साथ वार्ता ठप होने के बाद से उत्तर कोरिया लगातार अपने परमाणु और मिसाइल हथियारों को मजबूत कर रहा है। माना जा रहा है कि उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ज्यादा हथियारों के जरिए अमेरिका पर दबाव बनाकर रियायतें हासिल करना चाहते हैं।
इतना ही नहीं विश्लेषकों का यह भी कहना है कि हालिया हथियार परीक्षण उत्तर कोरिया की सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी की कांग्रेस से पहले अपनी सैन्य ताकत दिखाने का प्रयास है। यह कांग्रेस फरवरी में होने की उम्मीद है और पांच साल बाद होने वाली यह बैठक देश की सबसे बड़ी राजनीतिक घटनाओं में से एक मानी जाती है, जिसमें नई राजनीतिक और आर्थिक प्राथमिकताएं तय की जाती हैं।
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