
इंदौर। अब मेडिकल स्टोर्स से किसी भी निजी कम्पनी का ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) यानी जीवन रक्षक घोल भूलकर भी न खरीदें। भारत सरकार के खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण ने निजी कंपनियों द्वारा ओआरएस का लेबल लगाकर कई रंग और कई फ्लेवर में बेचे जाने फ़ूड और एनर्जी ड्रिंक प्रोडक्ट पर अब सख्ती से रोक लगा दी है।
जिला स्वास्थ्य विभाग इंदौर सीएमएचओ के अनुसार दस्त, उल्टी, डायरिया बुखार में इलाज के दौरान प्रथम चिकित्सा बतौर शरीर मे सोडीयम पोटेशियम की कमी को पूरा करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अधिकृत ह्रक्रस् (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) का इस्तेमाल किया जाता है। इसका कन्टेन्ट और पेटेंट सिर्फ ङ्ख॥ह्र ( विश्व स्वास्थ्य संगठन ) के पास सुरक्षित है मगर कई सालों से देश की कई नामचीन निजी कम्पनियां ह्रक्रस् का लेबल लगाकर अपने फ़ूड प्रोडक्ट एनर्जी ड्रिंक का सालों से व्यापार करती आ रही हैं, जबकि यह अनुचित है।
चिकित्सा मापदंडों के हिसाब से निजी कंपनियों के ओआरएस लेबल वाले फ़ूड प्रोडक्ट का स्वास्थ्य या इलाज से कतई कोई सम्बन्ध नहीं है। हाल ही में भारतीय खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण ने 14 अक्टूबर से निजी कम्पनियों के प्रोडक्ट पर ओआरएस का लेबल लगाने को अवैध घोषित करते हुए गैरकानूनी करार दिया है।
सिर्फ विश्व स्वास्थ्य संगठन का ही ओआरएस जीवन रक्षक घोल है
डाक्टर हसानी ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा अधिकृत ओआरएस (ओआरस) घोल में साफ पानी में चीनी और नमक का सटीक कंन्टेन्ट मतलब मिश्रण होता है ।इसे शरीर मे ग्लूकोज और इलेक्ट्रोलाइट्स के संतुलन के लिए तैयार किया जाता है मगर कई निजी कम्पनियो ने जीवन रक्षक घोल के ओआरएस ब्रांड को व्यापार का जरिया बना वह कई कलर और कई फ्लेवर में अपने फ़ूड और एनर्जी ड्रिंक प्रोडक्ट बेच कर हर दिन करोड़ो रूपये कमा रहे जबकि इनके इन प्रोडक्ट का चिकित्सा से कोई सम्बन्ध नही है।
जब भी ओआरएस की जरूरत हो, इसे सिर्फ सरकारी अस्पताल अथवा स्वास्थ्य केंद्र से ही ले। सिर्फ सरकारी चिकित्सा संस्थानों में मिलने वाला ओआरएस ही विश्व स्वास्थ्य संगठन और फ़ूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया से मान्यता प्राप्त और अधिकृत है। -डाक्टर माधव हसानी, सीएमएचओ जिला स्वास्थ्य विभाग इंदौर

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