नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव (Military Tension) और फारस की खाड़ी में जहाजों पर हमलों (Attacks on Ships) की खबरों के बीच कच्चे तेल (Crude oil) की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। सोमवार को वायदा कारोबार में कीमत 504 रुपये बढ़कर 6,596 रुपये प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। आपूर्ति बाधित (supply disruption) होने की आशंका से वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है।
होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ी चिंता
फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला Strait of Hormuz वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का अहम मार्ग है। भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 50% हिस्सा और बड़ी मात्रा में एलपीजी इसी समुद्री रास्ते से होकर आती है। इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत से आने वाले टैंकर इसी मार्ग पर निर्भर हैं।
क्षेत्र में अस्थिरता लंबी खिंचती है तो भारत की गैस आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है। जानकारों के अनुसार सरकार वैकल्पिक मार्गों और स्रोतों की संभावनाएं खंगाल रही है।
पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर हालात का जायजा लिया है। सूत्रों के मुताबिक, यदि खाड़ी क्षेत्र में जोखिम बढ़ता है तो भारत रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा सकता है।
2022 के बाद रूस भारत का बड़ा आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा था, हालांकि हाल के महीनों में अमेरिका और खाड़ी देशों से आयात बढ़ने के कारण रूस की हिस्सेदारी घटकर 20% से नीचे आ गई। फिलहाल भारत के पास लगभग 74 दिनों का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार है, जिससे तत्काल संकट की स्थिति नहीं है। लेकिन तनाव लंबा चला तो इन भंडारों पर दबाव बढ़ सकता है।
गैस आपूर्ति भी अहम मुद्दा
जनवरी 2026 से भारत ने खाड़ी देशों और अमेरिका से कच्चे तेल का आयात बढ़ाया था। फरवरी 2026 में देश ने 2.03 मिलियन टन एलपीजी आयात की, जिसमें से 1.66 मिलियन टन गैस खाड़ी क्षेत्र से आई। ऐसे में सुरक्षित समुद्री मार्ग और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों पर जोर दिया जा रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान द्वारा सऊदी अरब और कुवैत की ऊर्जा कंपनियों पर हमलों से क्षेत्रीय रिफाइनिंग गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। सऊदी की ऊर्जा दिग्गज Saudi Aramco पर हमले की खबरों ने बाजार में और चिंता बढ़ाई है।
वैश्विक असर की आशंका
ईरान प्रतिदिन करीब 16 लाख बैरल तेल निर्यात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा चीन को जाता है। यदि यह आपूर्ति बाधित होती है तो चीन को वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख करना पड़ेगा, जिससे वैश्विक कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।
इस बीच, तेल उत्पादक देशों के समूह OPEC+ ने अप्रैल में उत्पादन 2.06 लाख बैरल प्रतिदिन बढ़ाने का फैसला किया है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि पश्चिम एशिया में हालात बिगड़ते हैं तो अतिरिक्त उत्पादन भी कीमतों को स्थिर रखने के लिए पर्याप्त नहीं होगा।
40 देशों से खरीद रहा भारत तेल
भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। फिलहाल भारत करीब 40 देशों से तेल खरीद रहा है, जबकि 2022 से पहले यह संख्या 27 थी। आपूर्ति स्रोतों का यह विविधीकरण भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हालात में भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती दोहरी है—एक ओर पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना और दूसरी ओर ऊंची कीमतों से घरेलू महंगाई पर पड़ने वाले असर को सीमित रखना।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved