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एक व्यक्ति नहीं बन सकता NOTA … SC ने पूछा- इस विकल्प से क्या ‘निर्वाचित नेताओं की उत्कृष्टता’ में सुधार हुआ?

February 25, 2026

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मंगलवार को पूछा कि क्या विधानसभा (Assembly) और आम चुनावों (General Elections) में नोटा (NOTA) विकल्प के प्रावधान से ‘निर्वाचित नेताओं की उत्कृष्टता’ में कोई सुधार हो पाया है? एकल उम्मीदवार वाले चुनावों सहित सभी चुनावों में ‘नोटा’ विकल्प को अनिवार्य बनाने का अनुरोध करने वाली एक याचिका की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि इस विकल्प से एक सीट भी नहीं भरी जा सकती है।

देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के एक प्रावधान को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें यह कहा गया कि संबंधित प्रावधान मतदाताओं को एकमात्र उम्मीदवार के मामले में ‘नोटा’ विकल्प चुनने से रोकता है। पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज बनाम भारत संघ के मामले से संबंधित ऐतिहासिक फैसले में जारी निर्देश के मद्देनजर 2013 में ‘नोटा’ (उपर्युक्त में से कोई नहीं) को पेश किया गया था।


  • नोटा एक ​​व्यक्ति नहीं बन सकता
    मंगलवार को संक्षिप्त सुनवाई के दौरान, जस्टिस बागची ने पूछा, ”क्या नोटा के लागू होने से निर्वाचित नेताओं की उत्कृष्टता में सुधार हुआ है?” न्यायाधीश ने कहा कि नोटा एक ​​व्यक्ति नहीं बन सकता है क्योंकि अधिकतम वोट मिलने के बावजूद यह एक भी सीट नहीं भर सकता। पीठ ने यह भी कहा कि चुनावों में मतदान को अनिवार्य बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि अच्छे उम्मीदवार जीतें।

    इस तरह कानून की परीक्षा नहीं ली जा सकती
    अदालत ने इस बात पर भी खेद व्यक्त किया कि चुनावों में शिक्षित और संपन्न मतदाता, अशिक्षित मतदाताओं और महिलाओं की तुलना में शायद ही कभी मतदान करते हैं। अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमनी ने याचिका का विरोध करते हुए कहा, ”हम बहुत सारे काल्पनिक आधारों पर विचार कर रहे हैं। कानून की परीक्षा इस तरह नहीं ली जा सकती। मतदान का अधिकार संवैधानिक अधिकार है।”

    चुनाव आयोग को भी नोटिस
    शीर्ष अदालत ने अब इस याचिका पर सुनवाई के लिए 17 मार्च की तारीख तय की है। इसने 21 अक्टूबर, 2024 को याचिका पर विचार करने की सहमति जताई थी और केंद्र तथा निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया था। ‘विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी’ नामक कानूनी थिंक-टैंक द्वारा दायर जनहित याचिका में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 53(2) की वैधता को चुनौती दी गई है। धारा 53(2) में कहा गया है कि यदि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की संख्या भरी जाने वाली सीटों की संख्या के बराबर है, तो चुनाव अधिकारी उन सभी उम्मीदवारों को उन सीटों को भरने के लिए विधिवत निर्वाचित घोषित करेगा। याचिका में यह भी कहा गया है कि चुनाव संचालन नियम, 1961 के नियम 11 को प्रपत्र 21 और 21बी के साथ मिलाकर निरस्त किया जाए।

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