
अहमदाबाद। गुजरात हाईकोर्ट (Gujrat High Court) ने एक अहम आदेश में कहा है कि किसी भी जज (Judge) के पूरे सेवा रिकॉर्ड में अगर एक भी प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज हो जाए, या उसकी ईमानदारी पर संदेह खड़ा हो, तो उसे अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Retirement) दी जा सकती है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह का कदम सार्वजनिक हित में उठाया जाता है और यह सजा नहीं माना जाएगा।
अहमदाबाद में मंगलवार को सुनाए गए इस आदेश में हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति ए एस सुपेहिया और एल एस पिरजादा की खंडपीठ ने कहा कि न्यायपालिका पर जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए जजों का चरित्र बिल्कुल साफ-सुथरा होना चाहिए। अदालत ने कहा कि जज के खिलाफ एक भी नकारात्मक टिप्पणी या ईमानदारी पर शक उसे अनिवार्य सेवानिवृत्त करने के लिए पर्याप्त है।
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