
ठेके में बचा केवल एक महीना, करना है 62 लाख दस्तावेज स्कैन
इंदौर। नगर निगम (Municipal council) द्वारा किए जा रहे हैं दस्तावेजों (documents) के डिजिटलाइजेशन (Digitalization) के काम को जोरदार झटका लगा है। 11 महीने (11 months) की अवधि में ठेकेदार एजेंसी ने केवल 28 लाख दस्तावेजों को स्कैन किया है। अब इस एजेंसी के ठेके की अवधि में केवल एक महीना बचा है। अभी उन्हें 62 लाख दस्तावेजों को स्कैन करने का काम करना है।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव द्वारा बड़े शोर के साथ नगर निगम के दस्तावेजों के डिजिटलाइजेशन का काम शुरू कराया गया था। इसके लिए नगर निगम द्वारा टेंडर निकालकर एजेंसी को ठेका दिया गया था और उससे कहा गया था कि 1 साल में निगम के सारे 90 लाख दस्तावेजों को स्कैन करके डिजिटल फॉर्मेट में तैयार कर दें। निगम द्वारा बार-बार फाइल के गायब हो जाने, गुम जाने जैसी स्थिति को बदलने के लिए सालों पुरानी फाइलों का भी डिजिटल स्वरूप में एकत्रीकरण करने का काम किया जा रहा था। इस काम को डिजिटल इंदौर के अभियान से जोड़ा गया था। इस काम में दस्तावेजों को डिजिटल स्वरूप में तैयार करने का ठेका लेने वाली एजेंसी के काम की गति बहुत धीमी निकली है। महापौर परिषद के सदस्य राजेश उदावत ने निगम मुख्यालय के पुराने परिषद बैठक के हाल में जाकर वहां चल रहे इस काम का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि डिजिटलाइजेशन के लिए ठेका लेने वाली एजेंसी ने 11 महीने की अवधि में केवल 28 लाख दस्तावेज स्कैन कर डिजिटल स्वरूप में तैयार किए हैं। इस एजेंसी को निगम द्वारा ठेका देते हुए यह कहा गया था कि उन्हें 90 लाख दस्तावेजों को स्कैन कर उनकी डिजिटल फॉर्मेट में फाइल तैयार करना है। इस ठेके की अवधि 1 साल की है, जिसमें अब केवल एक महीने का समय शेष बचा है, जबकि इस एजेंसी के पास 62 लाख दस्तावेज स्कैन करने के लिए बचे हुए हैं। अब आज मंगलवार के दिन इस एजेंसी के संचालकों और इस मामले के जिम्मेदार अधिकारियों की बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में इस बात पर फैसला होगा कि अब इस काम को किस तरह से पूरा कराया जाए।