मॉस्को/वाशिंगटन। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव (Sergey lavrov) ने कहा है कि भारत द्वारा रूस से तेल (Oil) खरीद बंद करने की बात सिर्फ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कही है, जबकि भारत की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है। लावरोव ने यह टिप्पणी बुधवार को रूसी संसद के निचले सदन ‘स्टेट ड्यूमा’ (State Duma) में सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए की।
भारतीय नेतृत्व से ऐसा कोई बयान नहीं सुना
लावरोव ने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या अन्य भारतीय नेताओं की ओर से ऐसा कोई वक्तव्य सुनने को नहीं मिला, जिसमें रूस से तेल आयात रोकने की बात कही गई हो। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नई दिल्ली में आयोजित शेरपाओं की बैठक में ऊर्जा सुरक्षा को आगामी ‘ब्रिक्स’ शिखर सम्मेलन के प्रमुख मुद्दों में शामिल बताया था।
अमेरिका पर दबाव बनाने का आरोप
रूस ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह भारत सहित अन्य देशों को रूसी ऊर्जा खरीद से रोकने के लिए टैरिफ, प्रतिबंधों और अन्य आर्थिक उपायों का इस्तेमाल कर रहा है। लावरोव के अनुसार, वाशिंगटन विभिन्न “दबावपूर्ण तरीकों” के माध्यम से देशों के व्यापारिक निर्णयों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।
ब्रिक्स सहयोग और ऊर्जा मुद्दा रहेगा केंद्र में
लावरोव ने कहा कि 2026 में भारत की अध्यक्षता में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ऊर्जा सुरक्षा एक अहम विषय होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इसमें भाग लेंगे और भारत-रूस संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी।
पुतिन की भारत यात्रा का भी किया उल्लेख
रूसी विदेश मंत्री ने दिसंबर 2025 में राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा को द्विपक्षीय संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, उस दौरान कई संयुक्त दस्तावेजों पर हस्ताक्षर हुए, जिससे दोनों देशों की “विशेष रणनीतिक साझेदारी” और मजबूत हुई।
ऊर्जा बाज़ार को लेकर भी उठाए सवाल
लावरोव का कहना है कि भारत और अन्य देशों को सस्ती रूसी ऊर्जा खरीदने से हतोत्साहित किया जा रहा है, जिससे उन्हें महंगी अमेरिकी तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) खरीदने की ओर धकेला जा रहा है। उन्होंने इसे वैश्विक आर्थिक प्रभुत्व स्थापित करने की कोशिश करार दिया।
भारत ने संभाली ब्रिक्स की अध्यक्षता
भारत ने 1 जनवरी 2026 से औपचारिक रूप से ब्रिक्स की अध्यक्षता ग्रहण की है। ब्रिक्स अब 10 सदस्यीय समूह बन चुका है, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका के साथ नए सदस्य देश भी शामिल हैं।
निष्कर्ष
रूस के ताजा बयान से स्पष्ट है कि भारत-रूस ऊर्जा सहयोग को लेकर दोनों देशों का रुख कायम है, जबकि अमेरिका के दावों और रूस के आरोपों के बीच भू-राजनीतिक और आर्थिक प्रतिस्पर्धा की रेखाएं और स्पष्ट होती दिखाई दे रही हैं।
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