
नई दिल्ली । कांग्रेस सहित विपक्ष के सांसदों (Opposition MPs including Congress) ने संसद परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया (Staged strong protest in Parliament Premises) । यह प्रदर्शन शुक्रवार को उस समय हुआ, जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा तथाकथित ‘एपस्टीन फाइल्स’ मामले में लगाए गए आरोपों के बाद केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के इस्तीफे की मांग तेज हो गई।
कांग्रेस सांसदों ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि इस पूरे मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए और संबंधित मंत्री को पद छोड़ना चाहिए। कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने राहुल गांधी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि वे किसानों के हितों की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी सही बोल रहे हैं। किसानों के खिलाफ समझौता किया जा रहा है और वे इस नई डील के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। हम यह लड़ाई जारी रखेंगे, चाहे हमें सदस्यता से ही क्यों न हटा दिया जाए।” राजीव शुक्ला ने बांग्लादेश के चुनावों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वहां बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) की नई सरकार बनने जा रही है, जिसका नेतृत्व तारिक रहमान करेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई सरकार भारत के साथ सहयोग और प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़ेगी।
कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने भी राहुल गांधी का समर्थन किया। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, “सदन में कुछ बयान सिर्फ चर्चा और कार्यवाही से ध्यान भटकाने के लिए दिए जाते हैं। वरना कुछ नहीं है, ये बयान सिर्फ मीडिया के लिए होते हैं। इनमें कोई असली गंभीरता नहीं होती।”
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने चंडीगढ़ की एक पुनर्वास कॉलोनी में गंदे पानी की समस्या को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दूषित पानी पीने से कई लोग बीमार पड़ गए हैं और कुछ बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। उन्होंने इसे बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि चंडीगढ़ एक केंद्र शासित प्रदेश है, ऐसे में वहां इस तरह की अव्यवस्था गंभीर सवाल खड़े करती है।
लोकसभा सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भाजपा से सदन में शांति और सार्थक चर्चा की अपील की। उन्होंने कहा कि हंगामा नहीं होना चाहिए, बल्कि सरकार को जवाब देना चाहिए और विपक्ष को शांतिपूर्ण तरीके से मुद्दे उठाने चाहिए। उन्होंने रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार और महंगाई जैसे बुनियादी मुद्दों पर चर्चा की मांग की। साथ ही उत्तर प्रदेश के रामपुर में एक वकील की हत्या का मुद्दा उठाते हुए अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम लागू करने की मांग दोहराई।
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