
डेस्क: बांग्लादेश चुनाव में जहां तारिक रहमान की पार्टी को बड़ी जीत मिली है. वहीं चुनावी नतीजों में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की धमक भी बरकरार रही है. आवामी लीग के गढ़ में बड़े पैमाने पर वोट रद्द हुए हैं. इतना ही नहीं, जिन इलाकों में शेख हसीना का दबदबा माना जाता है, वहां जनमत संग्रह के पक्ष में जमकर ना वोट पड़े हैं. यह तब हुआ है, जब बांग्लादेश के चुनावी रण में इस बार आवामी लीग को उतरने नहीं दिया गया है.
बांग्लादेश प्रतिदिन के मुताबिक शेख हसीना के गढ़ गोपालगंज,चटगांव, बंदरबन, रंगमती, खगराचारी जैसे जिलों में ना वोटों का दबदबा रहा है. दरअसल, मोहम्मद यूनुस की सरकार ने जनमत संग्रह में हां वोट डालने के पक्ष में जमकर प्रचार किया था. ऐसे में इन इलाकों में ना के पक्ष में ज्यादा वोटों का पड़ना सरकार के लिए बड़ा झटका है.
बांग्लादेश चुनाव आयोग के मुताबिक गोपालगंज में ना के पक्ष में करीब 2.5 लाख वोट पड़े हैं. इसी तरह हां के पक्ष में 1.7 लाख वोट पड़े हैं. इसी तरह बंदरबन में हां के पक्ष में 71,417 तो ना के पक्ष में 90,156 वोट पड़े. चटगांव में ना के पक्ष में 1.25 लाख वोट तो हां के पक्ष में 80,580 पड़े.
2024 में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन हुआ. अंतरिम सरकार के गठन का मुख्य मकसद चुनाव कराना था. सरकार की कमान संभालते ही यूनुस ने आवामी लीग पर बैन लगा दिया, जिसके कारण आम चुनाव में आवामी लीग नहीं उतर पाई.
शेख हसीना ने पूरे चुनावी प्रक्रिया पर ही सवाल उठाया है. हसीना का कहना है कि यह चुनाव फर्जी तरीके से कराए गए हैं. इस चुनाव को जनता का समर्थन प्राप्त नहीं है. शेख हसीना का कहना है कि लोग मत देने घरों से नहीं निकले, क्योंकि उनकी अपनी पार्टी को चुनाव नहीं लड़ने दिया गया. बांग्लादेश चुनाव आयोग के मुताबिक इस बार 60 प्रतिशत वोट चुनाव में पड़े हैं. 2025 के आंकड़ों की मानें तो बांग्लादेश में कुल 12.7 करोड़ वोटर्स हैं.
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