
नई दिल्ली। पाकिस्तान (Pakistan) की राजधानी इस्लामाबाद (Islamabad) शुक्रवार को एक शिया मस्जिद (Shia Mosque) में हुए भयानक आत्मघाती हमले से दहल गई। शनिवार तक इस हमले में मरने वालों की संख्या 36 हो गई, क्योंकि अस्पताल में भर्ती कई गंभीर रूप से घायल लोगों ने दम तोड़ दिया। ग्लोबल आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (IS) ने हमले की जिम्मेदारी ली और इसे फिदायीन ऑपरेशन बताया।
इस बीच, पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने भारत पर आरोप लगाया कि वह उनके देश में उग्रवादी संगठनों को मदद दे रहा है। हालांकि, उन्होंने इस दावे के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किए। भारत ने शुक्रवार को इस्लामाबाद में हुए इस हमले में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया।
नकवी ने कहा, ”दाएश (IS) और तालिबान के नाम सामने आ रहे हैं, लेकिन उन्हें धन और लक्ष्य कहां से मिल रहे हैं,”—और बिना सबूत के उन्होंने भारत की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, ”मैं फिर से स्पष्ट करता हूं कि उनका वित्तपोषण भारत से हो रहा है।”
IS के आधिकारिक मुखपत्र ‘अमाक’ ने हमलावर की पहचान सैफुल्लाह अंसारी के रूप में की है। संगठन ने अंसारी की तस्वीर जारी की, जिसमें वह अपनी वफादारी की शपथ लेता दिख रहा है। IS ने कहा कि हमला ‘इस्लामिक स्टेट इन पाकिस्तान प्रोविंस’ (ISPP) के एक सिपाही द्वारा किया गया, जो 2019 से क्षेत्र में सक्रिय था।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने हमले की कड़ी निंदा की और कहा, ”यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पाकिस्तान अपनी घरेलू समस्याओं का समाधान करने के बजाय दूसरों को दोषी ठहरा रहा है। भारत इस तरह के सभी निराधार आरोपों को पूरी तरह खारिज करता है।” पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी बिना कोई सबूत प्रस्तुत किए, हमले में भारत और अफगानिस्तान का हाथ होने का दावा किया।
हमले के तुरंत बाद तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने बयान जारी कर अपनी किसी भी संलिप्तता से इनकार किया। IS के दावे से यह स्पष्ट हो गया है कि पाकिस्तान में सांप्रदायिक हिंसा को भड़काने के पीछे अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क का हाथ है। बयान में सीरिया में सक्रिय ‘ज़ैनाबियून ब्रिगेड’ की भी जानकारी दी गई है, जो इस हमले के पीछे सांप्रदायिक प्रतिशोध की ओर इशारा करती है।
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