
इस्लामाबाद। पाकिस्तान (Pakistan) भुखमरी और गंभीर आर्थिक संकट (Famine and Economic crisis) से जूझ रहा है, जिसके चलते वह एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund.- IMF) से नया कर्ज मांगने को मजबूर हो गया है। इसी को लेकर आईएमएफ के मिशन ने पाकिस्तान के आर्थिक प्रतिनिधिमंडल के साथ औपचारिक बैठक की, जिसमें 7 अरब डॉलर के ऋण कार्यक्रम और 1.1 अरब डॉलर की रेजिलिएंट सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी (आरएसएफ) के कार्यान्वयन की समीक्षा हुई। मंगलवार को मीडिया रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ। ‘डॉन’ के अनुसार, यह बैठक ऐसे समय हुई जब जून 2025 के अंत तक (समीक्षा अवधि) कार्यक्रम का प्रदर्शन मिश्रित रहा।
आईएमएफ की मिशन प्रमुख ईवा पेत्रोवा के नेतृत्व में दल ने सोमवार को वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब के नेतृत्व वाले पाकिस्तानी दल से मुलाकात की। इसमें स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के गवर्नर, वित्त सचिव और फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (एफबीआर) के चेयरमैन समेत प्रमुख आर्थिक हितधारक शामिल हुए। रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल दो सप्ताह तक पाकिस्तान में रहेगा और 7 अरब डॉलर की एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी (ईएफएफ) और 1.1 अरब डॉलर की आरएसएफ की प्रगति का मूल्यांकन करेगा। दोनों पक्ष दिसंबर 2025 तक समाप्त होने वाले द्विवार्षिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सुधारात्मक कदमों पर चर्चा करेंगे।
दरअसल, पाकिस्तान लंबे समय से अटकी हुई ब्राउनफील्ड पेट्रोलियम रिफाइनरी नीति को तेजी से लागू करने के लिए आईएमएफ से समर्थन की मांग कर रहा है। अपग्रेडेशन में देरी के कारण रिफाइनरियों के लिए करीब 6 अरब डॉलर का नया निवेश रुका पड़ा है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम आरएसएफ के उद्देश्यों से मेल खाता है, क्योंकि अपग्रेड से कम कार्बन और सल्फर उत्सर्जन वाले पेट्रोलियम उत्पाद बनेंगे जो यूरोपीय मानकों पर खरे उतरेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, आईएमएफ मिशन बाकी लक्ष्यों के शीघ्र क्रियान्वयन पर अधिकारियों के साथ सकारात्मक बातचीत भी करेगा।
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