
नई दिल्ली: अमेरिका-इजराइल और ईरान (America, Israel, and Iran) में जंग के चलते दुनिया के हर देश में ईंधन का संकट (Fuel Crisis) है. नेपाल भी इसकी चपेट में आ गया है. पड़ोसी देश नेपाल में पेट्रोल-डीजल की भारी कमी के चलते बालेन शाह सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए हफ्ते में दो दिन छुट्टी रखने का फैसला लिया है. सरकार के मुताबिक, सरकारी कार्यालयों और शैक्षिक संस्थानों में शनिवार और रविवार को साप्ताहिक अवकाश रहेगा.
नेपाल सरकार के प्रवक्ता एवं शिक्षामंत्री सस्मित पोखरेल के अनुसार, सरकार ने दफ्तरों का समय भी बदलते हुए सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक तय किया है. उन्होंने कहा, यह फैसला ईंधन आपूर्ति में आई दिक्कतों के कारण लिया गया है और नई व्यवस्था सोमवार से लागू होगी. सरकार की कैबिनेट मीटिंग में पेट्रोलियम की कमी को देखते इस फैसले पर मुहर लगाई गई है. उन्होंने कहा कि इसके अलावा पेट्रोल और डीजल के पुराने वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदलने पर भी चर्चा हुई है. जिसमें वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदलने के लिए आवश्यक कानूनी व्यवस्था की जाएगी.
सरकार का क्या है उद्देश्य?
सस्मित पोखरेल का कहना है कि कि मंत्रिपरिषद की रविवार को हुई बैठक ने इसके लिए आवश्यक कानूनी अड़चनों को दूर करने और उचित व्यवस्था बनाने के लिए संबंधित निकायों को निर्देश देने का फैसला किया. यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण और ईंधन खपत कम करने के उद्देश्य से लिया गया है. वर्तमान में पुराने ईंधन चालित वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदलने के दौरान पंजीकरण, नवीकरण और तकनीकी मानकों से जुड़ी स्पष्ट कानूनी व्यवस्था नहीं होने के कारण वाहन मालिकों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था.
इलेक्ट्रिक वाहनों से ईंधन पर निर्भरता होगी कम
प्रवक्ता पोखरेल ने कहा कि डीजल और पेट्रोल वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने के लिए आवश्यक कानूनी व्यवस्था की जाएगी. इससे एक ओर ईंधन पर निर्भरता कम होगी, तो दूसरी ओर नेपाल की नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा. पोखरेल ने कहा कि सरकार ने मौजूदा संकट को देखते हुए यह फैसला लिया है. आने-वाले समय में जब ये संकट के बादल छट जाएंगे तो पेट्रोल-डीजल वाहन मालिकों को भी राहम मिलेगी. लेकिन फिलहाल इस संकट को देखते हुए सरकार का फोकस इलेक्ट्रिक वाहनों पर है.
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