मनीला । ब्रिटेन में फिलीपींस (Philippines in Britain) के राजदूत टेडोरो लॉक्सिन जूनियर ने भारत-फिलीपींस संयुक्त नौसैनिक अभ्यास (India-Philippines joint naval exercise) के बाद भारतीय नौसेना (Navy) की तारीफ में जमकर कसीदे पढ़े। उन्होंने पश्चिमी देशों (western countries) की नौसेनाओं को लताड़ लगाते हुए कहा कि उनके पास इतनी हिम्मत नहीं जितनी भारतीय नेवी के पास है। क्योंकि भारतीय नेवी का जहां मन करता है वहां जाती है। बता दें कि टेडोरो लॉक्सिन जूनियर फिलीपींस के पूर्व विदेश मंत्री भी रह चुके हैं और वह अक्सर भारत और भारत की सेनाओं की तारीफ करते रहते हैं।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक बयान में कहा, “भारतीय नौसेना एकमात्र ऐसी नौसेना है जो जहां चाहती है, वहां जाती है; पश्चिमी नौसेनाएं तो कास्त्राती (ऊंचे स्वर में गाने वाले पुरुष गायक) की तरह बिना हिम्मत के गाती हैं।” यह बयान दक्षिण चीन सागर के पास भारत और फिलीपींस के बीच हुए पहले संयुक्त नौसैनिक अभ्यास के बाद आया। इस अभ्यास ने समुद्री दुनिया में भारत की बढ़ती भूमिका को दिखाया है। क्योंकि चीन की धमकी के चलते कई देश उस ओर जाने से भी डरते हैं।
इस घटना के बाद फिलीपींस के दूत ने कहा, “दक्षिण चीन सागर में अपनी जलसीमा में नौकायन को लेकर फिलीपींस का दृढ़ संकल्प पूरी तरह उसके साहस पर टिका है। देश के पास कोई सैन्य सहयोगी नहीं है- बिल्कुल शून्य। केवल भारतीयों में ही गश्त में शामिल होने की हिम्मत है। यह घटना विचार करने पर मजबूर करती है कि यदि उत्तरी अमेरिका पर मूल निवासियों का नियंत्रण होता, तो क्या वह अपने पूर्व उपनिवेश फिलीपींस के साथ खड़ा होता? ओह, मैं भूल गया; यह विचार वूंडेड नी की त्रासदी में दफन हो चुका है।” बता दें कि वूंडेड नी नरसंहार 29 दिसंबर, 1890 को अमेरिका के साउथ डकोटा में हुआ, जहां अमेरिकी सेना ने मूल अमेरिकी जनजातियों के समूह लकोटा सिउक्स के लगभग 150-300 लोगों को मार डाला। जिसमें महिलाएं और बच्चे शामिल थे। यह अमेरिकी आदिवासी युद्धों का क्रूर अंत था, जो मूल निवासियों के
प्रतिरोध और टूटी संधियों से उपजा।
फिलीपींस के दूत ने पश्चिमी नौसेनाओं की तुलना में भारतीय नौसेना की स्वतंत्रता और साहस की प्रशंसा की। उनका मानना है कि पश्चिमी देशों की सेनाएं गठबंधन की राजनीति और चीन के साथ तनाव प्रबंधन की रणनीति से बंधी हैं।
3 और 4 अगस्त को वेस्ट फिलीपीन सागर में हुए इस ऐतिहासिक द्विपक्षीय समुद्री सहयोग गतिविधि में भारतीय नौसेना के जहाजों- गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर आईएनएस दिल्ली, फ्लीट टैंकर आईएनएस शक्ति, और एंटी-सबमरीन युद्ध कॉर्वेट आईएनएस किल्टन ने हिस्सा लिया। वहीं, फिलीपींस की नौसेना ने अपने दो फ्रिगेट्स, बीआरपी जोस रिजाल और बीआरपी मिगुएल मालवर को तैनात किया। इस अभ्यास में रणनीतिक समन्वय, संचार जांच, हवाई रक्षा अभ्यास, और युद्धाभ्यास ड्रिल्स जैसे कई ऑपरेशन शामिल थे, जिनमें स्क्रीनिंग एक्सरसाइज, ओवर-द-होराइजन टारगेटिंग, और एंटी-सबमरीन युद्ध अभ्यास शामिल थे।
यह अभ्यास फिलीपींस के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में हुआ, जो दक्षिण चीन सागर का हिस्सा है और जिस पर चीन अपना दावा करता है। इस क्षेत्र में तनाव हाल के वर्षों में बढ़ा है, खासकर चीन और फिलीपींस के बीच स्कारबोरो शोल को लेकर। इस अभ्यास के दौरान, चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी के दो युद्धपोतों ने इसकी निगरानी की, लेकिन कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।
इस सैन्य तैनाती ने चीन को नाराज कर दिया है। फिलीपीन के सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल रोमियो ब्राउनर ने सोमवार को कहा कि रविवार से शुरू हुआ दो दिवसीय संयुक्त नौसैनिक अभ्यास सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। उन्होंने उम्मीद जताई कि फिलीपीन की सेनाएं भविष्य में भारत की सेना के साथ और अधिक संयुक्त युद्धाभ्यास में भाग ले सकेंगी।
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