
नई दिल्ली: पाकिस्तान (Pakistan) ने पंजाब (Punjab) की 48 वर्षीय सिख महिला (Sikh Woman) सरबजीत कौर (Sarabjit Kaur) को भारत (India) वापस भेजने की प्रक्रिया को आखिरी समय में रोक दिया है. सरबजीत कौर को पाकिस्तान में अपने प्रेमी (Lover) से शादी (Marriage) करने के बाद अवैध रूप से रहने का मामला सामने आया था, लेकिन डिपोर्टेशन के लिए तैयारियां पूरी होने के बावजूद सरबजीत को पाकिस्तान में ही रोक लिया है.
सरबजीत कौर भारतीय सिख तीर्थ यात्रियों के एक बड़े जत्थे के साथ 4 नवंबर 2025 को पाकिस्तान गई थीं. वे बाबा गुरु नानक देव जी की 556वीं जयंती के उत्सव में शामिल होने ननकाना साहिब पहुंची थीं. लेकिन जब जत्था तीर्थ यात्रा पूरी कर भारत लौटा, तो सरबजीत साथ नहीं थीं. वह पाकिस्तान में ही गायब हो गई थीं.
अगले दिन यानी 5 नवंबर 2025 को सरबजीत ने इस्लाम कबूल कर लिया और अपने प्रेमी नासिर हुसैन (जो पाकिस्तानी नागरिक हैं) से निकाह कर लिया. शादी के बाद उन्होंने अपना नाम नूर हुसैन रख लिया. दोनों कई दिनों तक छिपे रहे. इस बीच, पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व चेयरमैन सरदार मोहिंदरपाल सिंह ने लाहौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें कहा गया कि सरबजीत कौर का वीजा नवंबर 2025 में ही खत्म हो गया था. इसलिए वे पाकिस्तान में अवैध रूप से रह रही हैं.
सरदार मोहिंदरपाल सिंह की याचिका में फॉरेनर्स एक्ट 1946 और फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) के नियमों के तहत सरबजीत कौर को भारत डिपोर्ट करने की मांग की गई. कोर्ट ने कैबिनेट डिवीजन, पुलिस प्रमुख और अन्य अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है. बताया गया है कि सरबजीत कौर और नासिर हुसैन को 4 जनवरी 2026 को ननकाना साहिब के पास पेह्रेवाली गांव से पुलिस और खुफिया एजेंसियों की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार किया था.
याचिकाकर्ता के वकील अली चंगेजी सिंधु ने बताया कि पुलिस और इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड के अधिकारियों ने सरबजीत कौर और नासिर हुसैन को FIA के हवाले कर दिया था. डिपोर्टेशन के लिए वाघा बॉर्डर पर 5 जनवरी 2026 शाम को तैयारियां पूरी थीं, लेकिन ठीक उसी वक्त प्रक्रिया रोक दी गई. पाकिस्तानी अधिकारियों ने डिपोर्टेशन रोकने का कोई कारण नहीं बताया है.
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