
डेस्क। उत्तराखंड के बाद गुजरात में हाल ही समान नागरिक संहिता कानून के विधेयक पेश हुआ। गोवा में भी कुछ इस तरह का कानून पहले से ही है। इस कड़ी में अब महाराष्ट्र का नाम भी जुड़ गया है। अब महाराष्ट्र में भी यूसीसी जैसे कानून की मांग उठ रहा है। महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि वह समान नागरिक संहिता के संबंध में हितधारकों के साथ परामर्श कर रही है। यह कदम भाजपा के एक एमएलसी की और से राज्य विधानसभा में उत्तराखंड के समान एक कानून की मांग के बाद उठाया गया है। यह कानून सभी धर्मों के नागरिकों के लिए समान कानूनों को बढ़ावा देता है।
भाजपा के परिणय फुके ने बुधवार को विधान परिषद में यह मुद्दा उठाया। संयोग से उसी दिन गुजरात में भाजपा सरकार ने भी राज्य में यूसीसी लाने के लिए एक विधेयक पेश किया। हालांकि, परिषद को सूचित किया गया कि सरकार को फुके के प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देने के लिए अधिक समय की आवश्यकता होगी, क्योंकि वह विभिन्न हितधारकों के साथ परामर्श कर रही है। परिषद की उपाध्यक्ष नीलम गोरहे ने कहा, “हमें मंत्री जी से एक पत्र मिला है जिसमें कहा गया है कि यह मुद्दा कई विभागों से संबंधित है। चूंकि यह मुद्दा महत्वपूर्ण है, इसलिए सभी विभागों को एक महीने के भीतर लिखित जवाब देना चाहिए। यदि आपको जवाब नहीं मिलता है, तो अध्यक्ष या हमें (अध्यक्ष को) सूचित करें, और हम एक बैठक आयोजित करेंगे।”
उन्होंने आगे कहा कि इस मुद्दे पर कानून और न्यायपालिका, महिला एवं बाल विकास और सामान्य प्रशासन विभागों से परामर्श की आवश्यकता है। एक व्यापक समाधान की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा, “यह एक महत्वपूर्ण कानून है। सरकार इस ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देना चाहती है, इसीलिए इसे कई विभागों को भेजा गया है।” फुके ने कहा कि संविधान में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि एक समान नागरिक संहिता के लिए प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि विवाह, तलाक और गोद लेने के लिए अलग-अलग कानून हैं। उन्होंने सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून की मांग की।एमएलसी ने कहा कि उत्तराखंड में इस संबंध में कानून है और महाराष्ट्र को भी इसी तरह के कानून की जरूरत है।
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