
नई दिल्ली। आरक्षण का मामला नया नहीं है। अब सुप्रीम कोर्ट ये विचार हो रहा है कि क्या SC/ST/OBC के अंदर आरक्षण का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंच रहा है या इन समूहों में सब कैटेगरी बनाई जा सकती है जिससे सभी को इसका लाभ मिले। इस के पीछे सुप्रीम कोर्ट की मंशा है कि इन आरक्षित केटेगरी में लाभ इन समूह के उन लोगों को मिले जो अब भी अत्यधिक पिछड़े हुए हैं। इस मामले पर विचार करने के लिए 7 जजों की एक संवैधानिक बेंच गठन करने का फैसला लिया है।
गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि राज्य सरकार के पास आरक्षण में उप-वर्गीकरण (sub classification) करने की शक्ति है और इसे आरक्षण सूची के साथ छेड़छाड़ के बराबर नहीं माना जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच ने कहा है कि राज्य की विधानसभा अनुसूचित जाति समूह के अंदर कुछ विशेष जातियों को विशेष सुविधा देने के लिए कानून बना सकती है।
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