img-fluid

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का देश के नाम संबोधन

August 14, 2025

नई दिल्ली: पूरे देश में कल यानि कि 15 अगस्त को 79वां स्वतंत्रता दिवस समारोह का जश्न मनाया जाएगा. वहीं स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के नाम अपना संबोधन दिया है. राष्ट्रपति मुर्मू ने देश को संबोधित करते हुए कहा, ‘मेरे प्यारे देशवासियों, नमस्कार, स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आप सभी को मैं हार्दिक बधाई देती हूं. हम सभी के लिए यह बहुत गर्व की बात है कि स्वाधीनता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे त्योहारों को हम सभी भारतीय उत्साह और उमंग के साथ मनाते हैं. ये दिवस हमें भारतीय होने के गौरव का विशेष स्मरण कराते हैं.’

राष्ट्रपति ने आगे कहा, ‘ 15 अगस्त की तारीख हमारी सामूहिक स्मृति में गहराई से अंकित है. औपनेविशक शासन की लंबी अवधि के दौरान देशवासियों की अनेक पीढ़ियों ने ये सपना देखा था कि एक दिन देश स्वाधीन होगा, देश के हर हिस्से में रहने वाले, पुरुष महिलाएं और बूढ़े जवानों ने विदेशी शासन की बेड़ियों को तोड़ फेंकने के लिए व्याकुल थे. उनके संघर्ष निराशा नहीं अपितु बलवती आशा का भाव था. आशा का वही भाव स्वतंत्रता के बाद हमारी प्रगति को उर्जा देता रहा है. कल जब हम अपने तिरंगे को सलामी दे रहे होंगे, तो वहां उन सबी स्वाधीनता सेनानियों को भी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे जिनके बलिदान के बल पर 78 साल पहले 15 अगस्त के दिन भारत ने स्वाधीनता हासिल की थी.’

राष्ट्रति ने देश को संबोधित करते हुए देश की आजादी के समय हुई विभाजन की विभीषिका की याद दिलाते हुए कहा, ‘अतीत को देखते हुए, हमें देश के विभाजन से हुई पीड़ा को कभी नहीं भूलना चाहिए.आज हमने विभाजन विभीषिका दिवस भी मनाया है.देश की आजादी के बाद हुए विभाजन की वजह से हमने भयावह हिंसा देखी गई और लाखों लोगों को विस्थापित होने के लिए मजबूर किया गया. आज हम इतिहास की गलतियों के शिकार हुए लोगों को भी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं.

राष्ट्रपति ने आगे कहा कि हमारे संविधान के मुताबिक देश के प्रत्येक व्यक्ति समान है और सभी को इस बात का अधिकार है कि उनके साथ गरिमापूर्ण व्यवहार हो. स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा-सुविधाओं तक, सभी की समान पहुंच होनी चाहिए. देश के सभी लोगों को एक समान अवसर मिलने चाहिए. जो लोग पारंपरिक व्यवस्था के कारण वंचित रह गए थे, उनकी मदद करनी चाहिए क्योंकि उन्हें मदद की जरूरत थी. इन सिद्धांतों को सर्वोपरि रखते हुए हमने 1947 में हमने एक नई यात्रा शुरू की.

राष्ट्रपति ने देश को संबोधित करते हुए हमारे संविधान के चार मूल्यों के बारे में बताया. उन्होंने कहा, ‘प्यारे देशवासियों, हमारे संविधान में ऐसे चार मूल्यों का उल्लेख है, जो हमारे लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाए रखने वाले चार स्तंभ हैं. ये मूल्य हैं- न्याय, स्वतंत्रतता,समता और बंधुत्व. ये हमारी सभ्यता के ऐसे सिद्धांत हैं, जिन्हें हमने स्वाधीनता संग्राम के दौरान पुन: जीवंत बनाया. मेरा मानना है कि इन सभी मूल्यों के मूल में व्यक्ति की गरिमा की अवधारणा विद्यमान है.

Share:

  • प्रेमानंद महाराज को किडनी देना चाहते हैं राज कुंद्रा, पत्नी शिल्पा शेट्टी संग पहुंचे वृंदावन, जताई ये इच्छा

    Thu Aug 14 , 2025
    वृंदावन। बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी अपने पति राज कुंद्रा के साथ वृंदावन पहुंचीं। दोनों ने प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन किए और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान दोनों ने संत पर प्रेमानंद से एकांत में विशेष वार्तालाप भी किया। सूत्रों के अनुसार, बातचीत के दौरान राज कुंद्रा ने अपनी किडनी प्रेमानंद […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved