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रूस से तेल बंद करने का दबाव, भारत को हो सकता है भारी आर्थिक और रणनीतिक हितों को नुकसान

February 14, 2026

नई दिल्ली । भारत (India) और अमेरिका (America) के बीच व्यापार समझौते (Trade Agreements) की चर्चाएं तेज हैं। हालिया घोषणा के अनुसार भारत और अमेरिका ने एक अंतरिम समझौते पर सहमति व्यक्त की, जिसके तहत अमेरिकी वस्तुओं (American goods) पर भारत (India) के लगाए गए टैरिफ घटाए गए हैं, और अमेरिका उम्मीद कर रहा है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस से तेल खरीदना कम करे और वेनेजुएला से तेल खरीदे।

लॉजिस्टिक्स और लागत
रूस से भारत तक तेल आने में औसतन 36 दिन लगते हैं, जबकि वेनेजुएला से 54 दिन। दूरी बढ़ने से प्रति बैरल लगभग 2 डॉलर अतिरिक्त खर्च आएगा। इसके अलावा, वेनेजुएला का उत्पादन रोजाना लगभग 10 लाख बैरल है, जबकि भारत रूस से रोजाना 16 लाख बैरल आयात करता था। इसका मतलब है कि वेनेजुएला अकेले रूस की आपूर्ति की भरपाई नहीं कर सकता।

रिफाइनिंग की चुनौती
भारत की प्राइवेट रिफाइनरियां (जैसे रिलायंस जामनगर, नायरा एनर्जी) वेनेजुएला का भारी तेल संसाधित कर सकती हैं और मुनाफा कमाती हैं। लेकिन सरकारी रिफाइनरियां मुख्य रूप से रूसी और मध्य पूर्वी तेल के लिए डिज़ाइन हैं। वे वेनेजुएला के तेल को कुशलतापूर्वक रिफाइन नहीं कर पाएंगी, जिससे सरकारी कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।


  • भू-राजनीतिक असर
    अगर भारत रूस से तेल खरीदना बंद करता है, तो रूस के बड़े ग्राहक के रूप में चीन उभर सकता है, जिससे रूस-चीन का गठबंधन मजबूत होगा। यह भारत की सुरक्षा और रणनीतिक हितों के लिए चुनौती पैदा कर सकता है।

    रक्षा और निवेश पर प्रभाव
    भारत रूस को तेल के बदले रुपये में भुगतान करता है, जिससे रूस के पास भारत में निवेश के लिए बड़ा फंड जमा होता है। अगर भारत तेल खरीदना बंद करता है, तो यह तंत्र ध्वस्त हो सकता है और निवेश योजना प्रभावित होगी।

    अमेरिका का उद्देश्य और कृषि विरोध
    अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से दूर रहे और वेनेजुएला से तेल खरीदे, जिससे अमेरिकी तेल कंपनियों को फायदा होगा। समझौते के तहत अमेरिकी टैरिफ में कमी भारत के लिए लाभदायक लगती है, लेकिन किसानों को डर है कि अमेरिकी डेयरी और अन्य कृषि उत्पादों के आयात से उनकी आजीविका खतरे में पड़ सकती है। अमेरिका और यूरोपीय संघ के व्यापार दबावों के बीच भारत को संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है।

    विशेषज्ञों की राय
    एलिजाबेथ रोश (ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी) का कहना है कि भारत रक्षा के लिए अमेरिका और यूरोपीय देशों की ओर देख सकता है, लेकिन तेल का मुद्दा रूस के साथ संबंधों और रणनीतिक संतुलन पर बड़ा असर डाल सकता है। रेशमी काजी (जामिया मिल्लिया इस्लामिया) के अनुसार, वेनेजुएला की उत्पादन क्षमता सीमित है और लॉजिस्टिक्स व लागत की वजह से यह विकल्प व्यावहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण है।

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