
नई दिल्ली। देश में ग्रीन मोबिलिटी (Green Mobility) को बढ़ावा देने के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (Charging Infrastructure) की कमी को दूर किया जाएगा। अगले कुछ महीनों के अंदर राज्य सरकारों द्वारा चार्जिंग प्वाइंट व स्टेशन (Charging points and stations) बनाने की दिशा में तेजी से काम शुरू होगा क्योंकि लंबी कवायद के बाद ऊर्जा मंत्रालय ने चार्जिंग स्टेशन पर इस्तेमाल होने वाले सामान की कीमतों को संशोधित कर दिया है। अब राज्य सरकारें नोडल एजेंसी के माध्यम से चार्जिंग स्टेशन बनाने की काम शुरू कर पाएंगी।
पीएम ई-ड्राइव योजना
पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत चार्जिंग ढांचा तैयार करने के लिए बीते वर्ष केंद्र सरकार ने दो हजार करोड़ रुपये का प्रावधान है। इसके तहत राज्यों को चार्जिंग स्टेशन पर आने वाले खर्च पर 100 फीसदी तक सब्सिडी प्रदान की जाएगी, लेकिन राज्यों का तर्क है कि चार्जिंग स्टेशन पर होने वाले की दरें कई वर्ष पहले निर्धारित की गई थी, उसके बाद से चार्जिंग स्टेशन तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले उत्पादों की कीमतें बढ़ गई है इसलिए नई कीमतें निर्धारित की जाएं।
इसके बाद भारी उद्योग मंत्रालय ने नई दरों का आकलन करने का जिम्मा ऊर्जा मंत्रालय को सौंपा था। भारी उद्योग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव डॉ. हनीफ कुरैशी का कहना है कि ऊर्जा मंत्रालय से संशोधित दरें प्राप्त हो गई हैं जो राज्य सरकारों को मुहैया करा दी गई हैं। अब राज्य जल्द ही, चार्जिंग स्टेशन बनाने की दिशा में काम करेंगे। उन्होंने बताया कि सरकार का अनुमान है कि वर्ष 2030 तक देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या 10 फीसदी से ऊपर होगी। ऐसे में देश भर में 72 हजार से अधिक सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन बनाए जाने हैं।
योजना के तहत निवेश को मिला बढ़ावा
देश में उन्नत ऑटोमोबाइल तकनीक के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई पीएलआई ऑटो योजना ने निवेश में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। योजना के तहत अब तक 35,657 करोड़ का निवेश हो चुका है, जबकि 2321.94 करोड़ की प्रोत्साहन राशि कंपनियों को जारी की जा चुकी है।
वर्ष 2023-24 से पांच वर्ष के लिए शुरू की गई योजना के लिए कुल बजट 25938 करोड़ है। इसके तहत वित्त वर्ष 2024–25 में चार स्वीकृत कंपनियों को 322 करोड़ की प्रोत्साहन राशि दी गई। वहीं, वित्त वर्ष 2024–25 के लिए अब तक पांच कंपनियों को कुल 1,999 करोड़ जारी किए जा चुके हैं।
ध्यान रहे कि योजना के तहत केवल उन्हीं उत्पादों को प्रोत्साहन दिया जाता है, जिनमें कम से कम 50 प्रतिशत घरेलू मूल्य संवर्धन होता है। अब तक मूल उपकरण निर्माता श्रेणी के आठ आवेदकों को 94 वैरिएंट्स के लिए और कंपोनेंट श्रेणी के 10 आवेदकों को 37 वैरिएंट्स के लिए घरेलू मूल्य संवर्धन प्रमाणन दिया गया है।
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