
नई दिल्ली। सिडनी क्रिकेक ग्राउंड (Sydney Cricket Ground)पर ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच एशेज सीरीज 2025-26 (Ashesseries 2025-26)का आखिरी मुकाबला खेला जा रहा है। इस मुकाबले में न तो ऑस्ट्रेलिया और न ही इंग्लैंड ने किसी स्पेशलिस्ट को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया है। आपको जानकर हैरानी होगी कि 1888 के बाद पहली बार ऑस्ट्रेलिया (Australia)की टीम किसी टेस्ट मैच में सिडनी के मैदान पर किसी ऑस्ट्रेलियाके बिना उतरी है। इस मैदान पर अक्सर देखने को मिलता था कि स्पिनरों ( spinners)को भी खूब मदद मिलती थी और चौथी पारी में स्पिनर अपना दमखम दिखाते थे, लेकिन मौजूदा कंडीशन्स(conditions) को देखते हुए ऐसा कहा जा सकता है कि ऑस्ट्रेलिया में स्पिन बॉलिंग को स्लो डेथ यानी धीमी मौत दी जा रही है।
सिडनी क्रिकेक ग्राउंड पर ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच एशेज सीरीज 2025-26 का आखिरी मुकाबला खेला जा रहा है। इस मुकाबले में न तो ऑस्ट्रेलिया और न ही इंग्लैंड ने किसी स्पेशलिस्ट को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया है। आपको जानकर हैरानी होगी कि 1888 के बाद पहली बार ऑस्ट्रेलिया की टीम किसी टेस्ट मैच में सिडनी के मैदान पर किसी स्पेशलिस्ट स्पिनर के बिना उतरी है। इस मैदान पर अक्सर देखने को मिलता था कि स्पिनरों को भी खूब मदद मिलती थी और चौथी पारी में स्पिनर अपना दमखम दिखाते थे, लेकिन मौजूदा कंडीशन्स को देखते हुए ऐसा कहा जा सकता है कि ऑस्ट्रेलिया में स्पिन बॉलिंग को स्लो डेथ यानी धीमी मौत दी जा रही है।
जिस मैच में एक दिन में 90 ओवर और मैच में करीब 450 ओवर तक हो सकते हैं। उस पूरी सीरीज में दोनों टीमों के स्पिनरों ने कुल 130 ओवर के करीब ही फेंके हैं। ऑस्ट्रेलिया में खेली गई तीन या उससे ज्यादा मैचों की किसी भी टेस्ट सीरीज में स्पिन द्वारा फेंकी गई सबसे कम गेंदें हैं। 9 ही विकेट स्पिनरों को मिले हैं और इसमें से 8 विकेट अकेले एडिलेड टेस्ट मैच में स्पिनरों को मिले, जो कि सीरीज का तीसरा टेस्ट था। उस मुकाबले में नाथन लियोन खेले थे, जो एक पारी में दो और एक पारी में 3 विकेट लेने में सफल हुए थे।
ऑस्ट्रेलिया में 2020 के बाद के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्पिनरों का यहां प्रति विकेट औसत 38 के करीब का है, जबकि तेज गेंदबाजों का 26 के आसपास का है। तेज गेंदबाजों को 50 गेंदों से कम में विकेट मिल रहा है, जबकि स्पिनरों का स्ट्राइक रेट 70 के आसपास का है। सीधे शब्दों में कहें तो, स्पिन धीमी, ज्यादा महंगी और कम खतरनाक हो गई है। यह स्किल में कमी के कारण नहीं, बल्कि इसलिए हुआ है, क्योंकि कंडीशन्स ने इसे अप्रासंगिक बना दिया है।
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