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राफेल बनाम JF-17 : जानिए दोनों में कौन ज्यादा ताकतवर ? ऑपरेशन सिंदूर में हो चुका मुकाबला

February 13, 2026

नई दिल्ली। भारत (India) ने फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों (fighter planes) की खरीद का फैसला बेहद सोच-समझकर लिया है। यह सौदा न केवल भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) की शक्ति बढ़ाएगा, बल्कि पाकिस्तान के JF-17 थंडर विमानों के मुकाबले भारत को तकनीकी और युद्धक बढ़त देगा।

राफेल बनाम JF-17
विशेषज्ञों के अनुसार, JF-17 सिंगल इंजन वाला चौथी पीढ़ी का विमान है, जबकि राफेल 4.5 पीढ़ी का दो इंजन वाला विमान है। राफेल की विमानन प्रणाली, हथियार प्रणाली, रडार और समग्र युद्धक क्षमताएं JF-17 से कहीं बेहतर हैं। गति लगभग बराबर है, लेकिन JF-17 ऊंचाई में थोड़ा बेहतर है और कीमत में किफायती है।

रक्षा विशेषज्ञ एयर वाइस मार्शल ओपी तिवारी के अनुसार, राफेल की खरीद भारत के लिए समझदारी भरा कदम है। 5वीं पीढ़ी के विमानों में सिर्फ गति और स्टील्थ फीचर अतिरिक्त होते हैं, जो भारत की सीमाओं पर उतनी जरूरी नहीं हैं।


  • ऑपरेशन सिंदूर में मुकाबला
    जब भारत ने सुखोई-30 विमानों के जरिये पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों और एयरबेस पर हमला किया, तब पाकिस्तान ने JF-17 विमानों का इस्तेमाल किया। राफेल ने उन्हें मुहतोड़ जवाब दिया और कई JF-17 नष्ट किए गए। राफेल के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई।

    राफेल क्यों?
    वायुसेना पहले से राफेल विमान इस्तेमाल कर रही है और प्रदर्शन से संतुष्ट है।
    एक जैसे विमानों से प्रशिक्षण और रखरखाव का खर्च कम होगा।
    फ्रांस ने AMCA निर्माण के लिए सेफ्रान इंजन तकनीक 100% ट्रांसफर करने का भरोसा दिया।
    भारत में 96 विमान बनेंगे, जिससे घरेलू विमान निर्माण क्षमता बढ़ेगी।
    हथियारों के सोर्स कोड मिलने से भारत अपनी हथियार प्रणाली फिट कर सकता है और लागत कम होगी।

    सुखोई-57 क्यों नहीं?
    5वीं पीढ़ी होने के बावजूद इसकी परफॉरमेंस और मेंटेनेंस भारत के लिए चुनौतीपूर्ण थी।
    रूस तत्काल आपूर्ति या भारत में निर्माण नहीं कर सकता था।
    वायुसेना की जरूरत तुरंत विमानों की थी।
    इसलिए राफेल ने JF-17 के मुकाबले तकनीकी और रणनीतिक बढ़त दी, और भारत की वायु सुरक्षा को मजबूत किया।

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