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प्राइवेट सेक्टर की नौकरियों में आरक्षण की ओर बढ़ रहे राहुल गांधी, EBC संकल्प 2029 की तैयारी तो नहीं!

September 27, 2025

पटना । 11 साल से केंद्र की सत्ता से बाहर कांग्रेस के नेता राहुल गांधी (Congress leader Rahul Gandhi) दलित और पिछड़ों की राजनीति के दम पर पार्टी में जान फूंकने की कोशिश लगातार कर रहे हैं। पटना में कांग्रेस वर्किंग कमेटी (Congress Working Committee) की बैठक के बाद बुधवार को राहुल ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) और विपक्षी महागठबंधन के नेताओं के साथ अति पिछड़ी जातियों (EBC) के लिए 10 वादों का एक संकल्प जारी किया। अति पिछड़े बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) के कोर वोटर माने जाते हैं। इन संकल्पों से संकेत मिल रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से लगातार मात खा रहे राहुल गांधी 2029 के लोकसभा चुनाव में प्राइवेट सेक्टर की नौकरियों में आरक्षण का एजेंडा आजमाने की तरफ बढ़ रहे हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का इसी साल कर्नाटक में दिया एक बयान भी प्राइवेट सेक्टर की नौकरियों में आरक्षण को लेकर कांग्रेस के अंदर चल रहे मंथन का इशारा करता है। खरगे ने वह बयान निजी शिक्षण संस्थानों में एडमिशन के संदर्भ में दिया था और कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 15(5) को पूरी तरह से लागू किया जाए। लेकिन इसी दौरान खरगे नौकरियों पर बोलने लगे और कहा- “केंद्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रम (PSU) जा रहे हैं, कॉरपोरेट कंपनी उनको खरीद रही हैं। नौकरी जा रही है। एससी, एसटी और ओबीसी के लिए कोई नौकरी नहीं है।”

ऐसा नहीं है कि खरगे इस तरह की बात करने वाले पहले बड़े नेता हैं। 19 दिसंबर 2003 को तब के पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने भी प्राइवेट सेक्टर की नौकरियों में आरक्षण की मांग का यह कहकर समर्थन किया था कि अगर सरकारी नौकरी में आरक्षण दिया जा सकता है तो प्राइवेट में क्यों नहीं। वाजपेयी ने कहा था- “आज एक महत्वपूर्ण मसला सामने आया है। अगर सरकारी नौकरी में आरक्षण है तो प्राइवेट जॉब्स में क्यों नहीं। इसके लिए माहौल बनाना होगा।” वाजपेयी ने इस पर आम सहमति बनाने की जरूरत की तरफ इशारा करते हुए कहा था कि किसी मसले को थोपा नहीं जा सकता। वाजपेयी की बात 2004 में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के हारने के बाद वहीं छूट गई और पार्टी ने इस मुद्दे को दोबारा नहीं छेड़ा।


  • बिहार विधानसभा चुनाव के लिए जारी ईबीसी संकल्प में एक तरफ सरकारी बहाली में एससी, एसटी और ओबीसी के पदों पर ‘Not Found Suitable- योग्य नहीं मिला’ के चलन को अवैध घोषित करना शामिल है, तो दूसरी तरफ राज्य के सभी प्राइवेट शिक्षण संस्थानों में आरक्षण लागू करना भी एजेंडा में रखा गया है। आरक्षित जातियों के बेरोजगार ‘Not Found Suitable’ को सरकारी नौकरियों में पिछले दरवाजे से हकमारी बताते हैं।

    प्राइवेट कॉलेज और यूनिवर्सिटी में अभी दाखिले में एससी, एसटी या ओबीसी के लिए आरक्षण का प्रावधान नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 15 (5) में शैक्षणिक संस्थानों में SC-ST के अलावा सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए आरक्षण का प्रावधान है। लेकिन इसका फायदा सिर्फ सरकारी या सरकारी मदद से चल रहे संस्थानों में मिल रहा है। यह संकल्प एडमिशन में रिजर्वेशन का दायरा प्राइवेट कॉलेज और यूनिवर्सिटी बढ़ाने का वचन है।

    कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली शिक्षा, महिला, बच्चे, युवा और खेल मामलों की संसदीय समिति ने 20 अगस्त 2025 को राज्यसभा में पेश अपनी रिपोर्ट में सरकार से सिफारिश की है कि सभी निजी उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी का 27 परसेंट, एससी का 15 परसेंट और एसटी का 7.5 परसेंट आरक्षण लागू हो। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे दाखिले को पूरी सरकारी वित्तीय सहायता मिलनी चाहिए। इसके लिए शिक्षा के अधिकार कानून के तहत प्राइवेट स्कूलों में रिजर्व 25 फीसदी पदों पर दाखिले के मॉडल की नकल करने कहा गया है, जिसमें सरकार ऐसे बच्चों की पढ़ाई का खर्च स्कूल को देती है।

    प्राइवेट नौकरी में आरक्षण को लेकर कांग्रेस में चल रहे किसी तरह के मंथन के सवाल पर पार्टी के एक राष्ट्रीय महासचिव ने नाम ना छापने की शर्त पर कहा कि पार्टी के किसी फोरम पर कोई चर्चा नहीं हुई है, लेकिन अनौपचारिक बातें तो हो ही रही है। नेता ने याद दिलाया कि मनमोहन सिंह सरकार में एक खरीद नीति बनाई गई थी, जिसके तहत यह अनिवार्य कर दिया गया था कि सभी सरकारी विभाग और कंपनियां सामान और सेवा खर्च का न्यूनतम 25 फीसदी हिस्सा सूक्ष्म और लघु उद्यमियों पर खर्च करेंगे। इसमें 4 फीसदी एससी-एसटी, जबकि 3 फीसदी महिलाओं के द्वारा चलाए जा रहे उद्यम या कंपनी से लेना होता है।

    राहुल गांधी कई बार कह चुके हैं और वह ईबीसी संकल्प में भी है कि आरक्षण की सीमा को 50 परसेंट से ऊपर बढ़ाने के लिए काम किया जाएगा। राहुल कुछ समय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चुनाव आयोग के अलावा किसी एक मसले पर टिके हुए हैं तो वो है दलित और पिछड़ों की बात। संविधान की कॉपी दिखाकर राहुल ने बार-बार आरक्षण की रक्षा और उसे विस्तार देने की बात कही है। खरगे का बयान और अति पिछड़ों के लिए बिहार में जारी संकल्प अगर कोई इशारा है तो अनुमान लगाया जा सकता है कि राहुल गांधी कांग्रेस का वनवास खत्म करने के लिए 2029 की तैयारियों की शुरुआत कर चुके हैं।

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