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2030 में दो बार रमजान! जानिए क्यों और कब, चांद और कैलेंडर का क्या संबंध है

February 18, 2026

नई दिल्ली। रमजान (Ramadan)मुसलमानों(Muslims) के लिए आत्मसंयम(self-restraint), इबादत और दया का पवित्र महीना(holy month) है। इस दौरान सूर्योदय से सूर्यास्त(sunrise to sunset) तक रोजा रखा जाता है, और लोग अपने जीवन को आध्यात्मिक रूप से शुद्ध करने की कोशिश करते हैं। यह समय परिवार, समाज(family, society) और खुद के साथ जुड़ने का भी होता है, जिसमें खान-पान और रोजमर्रा की आदतों पर खास ध्यान दिया जाता है।

दो रमजान कैसे संभव हैं?
आमतौर पर हर साल केवल एक ही रमजान आता है। लेकिन 2030 में ऐसा नहीं होगा। उस साल, अंग्रेजी कैलेंडर (ग्रेगोरियन) के हिसाब से जनवरी में एक रमजान शुरू होगा और दिसंबर में फिर से रमजान मनाया जाएगा। यानी एक ही सोलर साल में दो बार यह पवित्र महीना देखने को मिलेगा। यह स्थिति पिछली बार 1997 में हुई थी।

कैलेंडर का फर्क
इस्लामिक कैलेंडर पूरी तरह चांद पर आधारित होता है, जिसे लूनर कैलेंडर कहा जाता है। इसमें साल लगभग 354 दिन का होता है, जबकि सोलर या सूर्य आधारित कैलेंडर में 365 दिन होते हैं। इसलिए रमजान हर साल लगभग 10–11 दिन पहले आता है। यही अंतर 2030 में दो रमजान की वजह बनेगा।

खगोलशास्त्र की नजर
दुबई एस्ट्रोनॉमी ग्रुप के सीईओ हसन अहमद अल हरीरी के मुताबिक, यह कोई असामान्य घटना या चमत्कार नहीं है। सोलर और लूनर कैलेंडर अलग-अलग चलते हैं, इसलिए हर 33 साल में एक ऐसा साल आता है जब एक ही सोलर साल में दो रमजान पड़ते हैं। यह पूरी तरह कैलेंडर गणित का नतीजा है।

2026 में रमजान की संभावित तारीखें
हालांकि 2030 अभी दूर है, लेकिन 2026 में भी रमजान का समय जानना महत्वपूर्ण है। चूंकि हर साल यह करीब 10–11 दिन पहले आता है, इसलिए 2026 में रमजान लगभग 17 फरवरी से 18 मार्च तक रहने की संभावना है। सटीक तारीखें आसमान में चांद दिखने पर तय होती हैं।


  • चांद का महत्व
    रमजान की शुरुआत और समाप्ति चांद के दिखने पर निर्भर करती है। यही वजह है कि हर देश में आधिकारिक धार्मिक संस्थाएं नए चांद को देखकर इसकी घोषणा करती हैं। यूएई और अन्य मुस्लिम देशों में भी यही परंपरा अपनाई जाती है। यही चांद और कैलेंडर का मेल 2030 में दो रमजान का कारण बनेगा।

    2030 में दो रमजान कोई रहस्य या चमत्कार नहीं है, बल्कि यह खगोलीय गणना और परंपरा का सुंदर मेल है। मुसलमानों के लिए यह दो बार आत्मसंयम, दया और इबादत का अवसर होगा, और यह घटना हर 33 साल में एक बार ही देखने को मिलती है।

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