नई दिल्ली। आपने अभी तक आलू (Potato) की उपज मिट्टी (Yield soil) के अंदर देखी होगी. लेकिन बिहार के पश्चिम चंपारण में अनोखी किस्म की खेती हो रही है. जिसकी उपज हवा में होती है. खास बात यह है कि यह आलू औषधीय गुणों से भरपूर होता है. लिहाजा डायबिटीज के मरीज भी इसे खा सकते हैं. वहीं, बाजार में इसकी कीमत सामान्य आलू की तुलना में दोगुनी मिलती है.
पश्चिम चंपारणः ज़िले में इन दिनों आलू की एक ऐसी वेरायटी की खेती की जा रही है. जिसकी उपज खेत की मिट्टी में नहीं, बल्कि मचान या पेड़ों पर हवा में हो रही है. ज़िले के रामनगर प्रखंड स्थित हरपुर गांव निवासी कृषक विजय गिरी ने आलू की इस खास वेरायटी को अपने बागीचे में लगाया है. उनका कहना है कि इसका फलन ज़मीन पर नहीं, बल्कि हवा में किसी फल की तरह होता है. सामान्य आलू की तुलना में इसका आकार भी एकदम अलग होता है. कृषि वैज्ञानिकों की माने तो, यह स्टार्च, विटामिन्स, मिनिरल्स और एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर होता है. यही कारण है कि इसका सेवन डायबिटीज़ के पेशेंट्स भी कर सकते हैं.
मिट्टी नहीं, हवा में होती है इस आलू की उपज
नरकटियागंज स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में कार्यरत कृषि वैज्ञानिक डॉ.आशुतोष कुमार बताते हैं कि, विजय द्वारा उपजाए गए इस अनोखे आलू को हवाइयन आलू के नाम से जाना जाता है. जहां अन्य आलू की पैदावार ज़मीन पर होती है. वहीं हवाइयन आलू की खेती मचान बनाकर की जाती है. ऐसे में यह कद्दू जैसे किसी लत्तीदार सब्ज़ी की तरह हवा में ही फलने लगता है. देश भर में गिने चुने किसान ही इसकी खेती कर रहे हैं, जिनमें विजय का नाम भी शामिल है.
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