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सिरपुर तालाब में चूहों का आतंक, जमीन को कर दिया खोखला

February 02, 2026

  • विश्व वैटलैंड दिवस पर विशेष
  • तालाब के किनारे पर चूहों के सैकडों बिल

इंदौर, डा जितेन्द्र जाखेटिया। आज समूचे विश्व में विश्व वेटलैंड दिवस मनाया जा रहा है। इस वेटलैंड की अवधारणा के तहत ही इंदौर के सिरपुर तालाब को रामसर साइट के रूप में मान्यता दी गई है। यह रामसर साइट अब चूहों के आतंक से परेशान है। इस सिरपुर तालाब की पाल को बड़े-बड़े चूहे खोखला कर रहे हैं। तालाब के किनारे पर चूहों के सैकड़ो बिल नजर आ रहे हैं।

आद्र भूमि की रक्षा के लिए विश्व वेटलैंड दिवस मनाया जाता है। यह दिवस 2 फरवरी 1971 को ईरान के राम सर शहर में हुए अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन की वर्षगांठ का स्मरण करने के लिए इस दिन मनाया जाता है। वैश्विक स्तर पर ऐसे स्थान जिन्हें आधार भूमि के रूप में संरक्षित करना आवश्यक हो उन्हें रामसर साइट के रूप में चिन्हित किया गया है। इंदौर के सिरपुर तालाब को भी रामसर साइट घोषित किया गया है। इंदौर शहर की यह रामसर साइट चौहान का पनाह का बन गया है। सिरपुर तालाब की पाल को चूहा खोखला कर रहे हैं। इसके साथ ही तालाब के किनारे के क्षेत्र में चूहों के सैकड़ो बिल बन गए हैं। इस स्थान पर यदि जाए तो वहां पर बड़े-बड़े चूहे इधर से उधर दौड़ भाग करते हुए नजर आते हैं। चूहों के कारण यह रामसर साइट खतरे में पड़ गई है।


  • नागरिक जाकर देते हैं भोजन
    इस प्रतिनिधि ने जब इस स्थान का दौरा किया और वहां के चौकीदार से चूहा की इस स्थिति के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में शहर के लोग वहां पर जाते हैं और पाल पर चूहों के लिए भोजन रख देते हैं। इस स्थिति के कारण चूहों की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ गई है।

    निगम के पास योजना नहीं
    सिरपुर तालाब के क्षेत्र को चौहान से मुक्त करने के लिए इंदौर नगर निगम के पास कोई योजना नहीं है। पिछले दिनों ही रीगल तिराहा पर स्थित गांधी प्रतिमा और पास में बने शास्त्री ब्रिज का फुटपाथ चूहों के कारण चर्चित हो गया था। उस समय नगर निगम के द्वारा 40 लाख रुपए की खर्चे से इस क्षेत्र को चूहा मुक्त बनाने की घोषणा की गई थी। इस घोषणा के संदर्भ में शास्त्री पुल के फुटपाथ का नवनिर्माण भी शुरू हो गया है।

    एक तरफ अतिक्रमण, दूसरी तरफ चूहा
    सिरपुर तालाब के सीमांकन वाले क्षेत्र में एक तरफ जहां अतिक्रमण की भरमार है तो दूसरी तरफ चूहा भी चुनौती पैदा कर रहे हैं। जिला प्रशासन और नगर निगम के द्वारा कई बार तालाब की जमीन को अतिक्रमण से मुक्त करने का फैसला लिया जा चुका है। यह फैसला बैठक में लिया गया कागज पर दर्ज किया गया और कागज पर ही सीमट कर रह गया। इस तालाब के कैचमेंट एरिया में कई कॉलोनी का भी विकास हो चुका है और मकान का निर्माण किया जा चुका है।

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