
नई दिल्ली। बॉलीवुड एक्टर अमिताभ बच्चन(Actor Amitabh Bachchan) और उनके परिवार के लिए उनका एक्सीडेंट सबसे बुरा समय था। जुलाई 1982 में अमिताभ बेंगलुरु में कुली फिल्म की शूटिंग कर रहे थे और इसी दौरान उन्हें इतनी भयानक चोट(serious injury) लगी कि जानलेवा स्थिति बन गई। एक्टर की हालत इतनी गंभीर थी कि उन्हें एयर एम्ब्युलेंस (air ambulance) के जरिए मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल ले जाया गया था। इसके कुछ समय बाद इंडस्ट्री और परिवार से लोग मिलने आने लगे। अच्तोर्के ससुर (incident involving Tarun Kumar)और मशहूर जर्नलिस्ट तरुण कुमार(actor’s father-in-law) भादुड़ी भी अपनी बेटी जया के साथ अमिताभ को देखने ICU में गए थे। इस दौरान का पूरा वाकया तरुण कुमार ने खुद अपने एक लेख में बताया था। तरुण ने ये भी लिखा था कि अगर अमिताभ बचते नहीं तो लोग किसे दोषी मानते।
अगर अमिताभ नहीं बचते हो…
तरुण कुमार ने खुद को नास्तिक मानते थे। उन्होंने इस पूरी घटना के बारे में अपने लेख में बताया। उन्होंने लिखा था कि जब उन्हें अमिताभ के एक्सीडेंट की खबर मिली तो कुछ समय पहले ही वो बेटी जया के साथ लंदन में अपने भाई को देखने गए थे। फिर लखनऊ वाले घर लौटे। उन्हें अमिताभ के एक्सीडेंट की खबर मिली और वो तुरंत मुंबई के लिए रवाना हो गए। उन्होंने बताया कि उस समय पूरा देश अमिताभ के लिए प्रार्थना कर रहा था। और अमिताभ बच गए। उन्होंने लिखा, ‘हम लखनऊ से मुंबई के लिए रवाना हुए। पूरे देश में लोग अमिताभ के ठीक होने की दुआ कर रहे थे। यह एक अभूतपूर्व घटना थी। पूरा देश एक आदमी के लिए दुआ कर रहा था। लेकिन ऐसा ही हुआ। अमिताभ बच गए। मेरी पत्नी और लाखों लोगों ने कहा कि यह ‘ईश्वर की कृपा’ थी। मैं इससे सहमत नहीं हूं। मैंने अपनी पत्नी और जया से कहा कि अगर अमित नहीं बचते, तो सब डॉक्टरों को दोषी ठहराते। अब जब वे बच गए हैं, तो उन्होंने डॉक्टरों की तारीफ क्यों नहीं की? उनके पास कोई जवाब नहीं था। उन्हें लगा कि यह ईश्वर का चमत्कार है। मुझे ऐसा नहीं लगता। यह ब्रीच कैंडी अस्पताल का एक चिकित्सीय चमत्कार था।’
गले में ताबीज पहनती थीं जया
आगे तरुण कुमार ने ये भी बताया था कि कैसे उनकी बेटी जया ने मजबूती से इस बुरे समय का सामना किया था। तरुण कुमार ने अपने लेख में बेटी जया बच्चन के बारे में लिखा, ‘अमिताभ के अस्पताल में भर्ती रहने के दिनों में जया को देखना चाहिए था। वो एकदम शांत और संयमित नजर आती थीं। लेकिन साथ ही, उन्होंने वो सब किया जो लोगों ने उन्हें करने को कहा। उन्होंने तरह-तरह के मनके और ताबीज पहने और अमित के ठीक होने के लिए दिल से प्रार्थना की। उन्होंने ऊपर से तो हिम्मत दिखाई, लेकिन अंदर से वो सच्चाई को स्वीकार करने और सबसे बुरे हालात के लिए भी तैयार थीं।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved