
इंदौर। इंदौर नगर निगम द्वारा 153 कॉलोनियों से 100 करोड़ रुपए की वसूली की जाएगी। यह सभी वह कॉलोनी हैं, जो अवैध से वैध कर दी गई हैं। उक्त कॉलोनी वैध हो जाने पर इनमें रहने वाले नागरिक विकास शुल्क की राशि इंदौर नगर निगम को देने के लिए तैयार नहीं हैं। राज्य सरकार द्वारा तय किए गए मापदंड के अनुसार इंदौर नगर निगम द्वारा अवैध कॉलोनी को वैध करने का अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत अब तक 153 कॉलोनियों को वैध किया जा चुका है। इन कॉलोनियों को वैध करने पर नगर निगम नियम के अनुसार कॉलोनी में स्थित प्लाट के मालिकों से विकास शुल्क की राशि जमा करवाता है।
नगर निगम द्वारा इन सभी कॉलोनियों के लिए 12 से लेकर 40 तक का प्रति स्क्वेयर फीट का विकास शुल्क निर्धारित किया गया। निगम द्वारा कॉलोनी को वैïध करने की कार्रवाई के साथ कॉलोनी के प्लाट, भवन धारकों से विकास शुल्क की राशि भी जल्द से जल्द जमा करने के लिए कहा गया। निगम के इस अभियान को करारा झटका लगा है। अधिकांश कॉलोनियों में रहने वाले लोगों द्वारा विकास शुल्क की राशि जमा करने से मुंह मोड़ लिया गया। निगम के अधिकारियों ने बताया कि अब तक विकास शुल्क की राशि के रूप में कुल 6.70 करोड़ रुपए जमा हुए हैं। इनमें से भी कुछ कॉलोनियां ऐसी हैं, जिनमें 2500 वर्गफीट से ज्यादा आकार के प्लाट हैं। एसी कॉलोनी से ही विकास शुल्क के रूप में निगम को 5 करोड़ रुपए की राशि प्राप्त हुई है। इस तरह की कॉलोनियों की संख्या 13 है। अभी इन कॉलोनियों पर भी विकास शुल्क के 20 करोड़ रुपए बाकी हैं।
अब जोनल कार्यालय करेंगे वसूली
पिछले दिनों नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल द्वारा कॉलोनी पर बाकी विकास शुल्क की राशि वसूल करने के संबंध में समीक्षा की गई थी। इस समीक्षा बैठक में यह तथ्य सामने आया कि इन कॉलोनियों पर करोड़ों रुपए की राशि बकाया है। इस पर आयुक्त द्वारा निगम के सभी जोनल कार्यालय के अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे इस राशि की वसूली का कार्य करें। अभी तक इस राशि को वसूल करने के प्रयास नहीं हुए।
इंदौर के पास है गौरव
प्रदेश में सबसे ज्यादा अवैध कॉलोनियां होने का गौरव इंदौर के ही पास है। यह एकमात्र ऐसा शहर है, जिसमें दूसरे शहरों की तुलना में न केवल सबसे ज्यादा अवैध कॉलोनियां हैं, बल्कि लगातार अवैध कॉलोनी का निर्माण और विकास भी इस शहर में जारी है। निगम और प्रशासन के अधिकारियों द्वारा कई बार ऐलान किया गया कि अब कोई अवैध कॉलोनी नहीं बनने दी जाएगी, फिर भी अवैध कॉलोनी बनती रहीं और उनके प्लाट बकते रहे।
निगम खुद नियम भूल गया
इन कॉलोनियों को वैध करने की कार्रवाई करते समय शासन के निर्देश पर नगर निगम द्वारा यह तय किया गया था कि जब इन कॉलोनियों की ओर से विकास शुल्क की राशि जमा करवा दी जाएगी उसके बाद ही इन कॉलोनियों में विकास का कार्य किया जाएगा। अपने इस नियम को नगर निगम के अधिकारी ही भूल गए। दरअसल पार्षदों द्वारा ऐसी कॉलोनी में विकास कार्य करने के लिए प्रस्ताव देकर दबाव बनाया जाता है। ऐसे में निगम के अधिकारी विकास शुल्क की राशि जमा हुए बगैर ही इन कालोनियों में करोड़ों रुपए के विकास कार्य कर रहे हैं। जब निगम बराबर विकास कर देगा और सारी सुविधा देगा तो फिर विकास शुल्क कौन देगा?

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