नई दिल्ली। उभरते वैश्विक समूह (BRICS) को लेकर चल रही इस चर्चा पर कि क्या यह पश्चिमी सैन्य गठबंधन (NATO) की तर्ज पर कोई रक्षा संरचना बना सकता है, रूस ने स्पष्ट रुख सामने रखा है। मॉस्को ने कहा है कि ब्रिक्स का उद्देश्य सैन्य गठबंधन बनना नहीं, बल्कि आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग को मजबूत करना है।
रूस ने अटकलों को किया खारिज
रूस के उप विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने एक इंटरव्यू में कहा कि ब्रिक्स को मिलिट्री ब्लॉक में बदलने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने रूसी समाचार एजेंसी TASS से बातचीत में स्पष्ट किया कि यह समूह न तो सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था है और न ही सदस्य देशों की रक्षा जिम्मेदारी साझा करने वाला ढांचा।
सैन्य अभ्यास BRICS के तहत नहीं
जनवरी 2026 में दक्षिणी अफ्रीका के समुद्री क्षेत्र में आयोजित बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास Will for Peace 2026 को लेकर भी उठे सवालों पर रूस ने सफाई दी। यह अभ्यास दक्षिण अफ्रीका के पास आयोजित हुआ था, जिसमें चीन, ईरान और रूस शामिल थे।
रयाबकोव ने कहा कि यह ड्रिल ब्रिक्स के बैनर तले नहीं थी, बल्कि भाग लेने वाले देशों ने अपनी-अपनी राष्ट्रीय क्षमता में हिस्सा लिया था। इसलिए इसे ब्रिक्स की सामूहिक सैन्य गतिविधि के रूप में देखना गलत है।
सैन्य सुरक्षा नहीं, आर्थिक सहयोग पर फोकस
तेल टैंकरों या समुद्री सुरक्षा जैसे मुद्दों पर ब्रिक्स की संभावित भूमिका के सवाल पर रूस ने माना कि समूह के पास किसी प्रकार की सैन्य सुरक्षा देने की संरचना या क्षमता नहीं है।
ब्रिक्स का मुख्य कार्य आर्थिक समन्वय, व्यापारिक लॉजिस्टिक्स को मजबूत करना और प्रतिबंधों जैसी चुनौतियों के बीच वैकल्पिक सहयोग तंत्र विकसित करना है।
ईरान-अमेरिका संवाद पर कूटनीतिक संकेत
रूस ने यह भी संकेत दिया कि वह और चीन, ईरान तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच संवाद का माहौल बनाने में भूमिका निभा रहे हैं। क्षेत्रीय मध्यस्थों के जरिए चल रही अप्रत्यक्ष वार्ताओं को समर्थन देने की बात भी कही गई।
वैश्विक शक्ति संतुलन में BRICS की भूमिका पर चर्चा
विश्लेषकों का मानना है कि ब्रिक्स का विस्तार और बढ़ता आर्थिक प्रभाव इसे वैश्विक शक्ति संरचना में महत्वपूर्ण बना रहा है, लेकिन रूस के इस बयान से यह संकेत गया है कि समूह फिलहाल खुद को सैन्य गठबंधन की बजाय “आर्थिक-राजनयिक मंच” के रूप में ही स्थापित रखना चाहता है।
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