
नई दिल्ली।ज्योतिष शास्त्र (Astrology)में मंगल को अग्नि तत्व (Mars fire element)का ग्रह माना जाता है जबकि शनि दंडाधिकारी ग्रह हैं। जब इन दोनों शक्तिशाली ग्रहों (powerful planets)की युति होती है तो इसके परिणाम बेहद उग्र और भयावह माने जाते हैं। साल 2026 में ऐसी ही एक खतरनाक युति बनने जा रही है जो करीब 40 दिनों (approximately 40 days)तक असर दिखाएगी। ज्योतिषाचार्यों (astrologers)के अनुसार यह समय केवल व्यक्तिगत जीवन ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए उथल पुथल भरा हो सकता है।
Shani Mangal Dwand Yog का निर्माण
वर्तमान में मंगल मकर राशि में स्थित हैं और इसके बाद कुंभ राशि में गोचर करेंगे। फिर 2 अप्रैल 2026 को मंगल मीन राशि में प्रवेश करेंगे जहां पहले से ही शनि विराजमान होंगे। इस तरह मीन राशि में शनि और मंगल की युति बनेगी जिसे द्वंद्व योग कहा जाता है। मीन जल तत्व की राशि है और उसमें अग्नि तत्व के मंगल का प्रवेश भारी अशांति का संकेत देता है।
दुनिया में बढ़ सकती है अशांति
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार 2 अप्रैल से 11 मई 2026 तक यानी लगभग 40 दिनों का समय बेहद संवेदनशील रहेगा। इस दौरान दुनिया में हिंसा आंदोलन और विद्रोह की घटनाएं बढ़ सकती हैं। कई देशों के बीच तनाव युद्ध में बदल सकता है और जहां पहले से संघर्ष चल रहा है वहां हालात और बिगड़ सकते हैं। प्राकृतिक आपदाओं जैसे जल प्रलय भारी बारिश तूफान और समुद्री उथल पुथल की भी आशंका जताई जा रही है।
इन राशियों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
मिथुन राशि
मिथुन राशि के जातकों में इस दौरान गुस्सा अत्यधिक बढ़ा हुआ रहेगा। आवेश में आकर कोई गलत फैसला ले सकते हैं जिससे नुकसान हो सकता है। चोट चपेट या दुर्घटना की संभावना है। आर्थिक मामलों में सतर्कता जरूरी होगी क्योंकि धन हानि के योग बन रहे हैं।
धनु राशि
धनु राशि वालों को इस समय धैर्य रखना बेहद जरूरी है। जल्दबाजी में लिए गए फैसले विवाद को जन्म दे सकते हैं। किसी से झगड़ा या कानूनी परेशानी हो सकती है। पैसों का लेन देन सोच समझकर करें वरना आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
मीन राशि
मीन राशि में ही शनि और मंगल की युति बन रही है इसलिए इस राशि के जातकों पर इसका सबसे गहरा असर पड़ेगा। मानसिक तनाव बढ़ सकता है। बेवजह गुस्सा और चिड़चिड़ापन बना रहेगा। वाहन चलाते समय विशेष सावधानी रखें। रिश्तों में टकराव और विवाद की स्थिति बन सकती है।
सावधानी ही है सबसे बड़ा उपाय
ज्योतिष के अनुसार इस द्वंद्व योग के दौरान संयम धैर्य और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। गुस्से पर नियंत्रण रखें और किसी भी तरह के जोखिम से बचने की कोशिश करें।

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