
नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद अब SBI ने होम लोन (home loans) के ब्याज में बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है. एसबीआई ने होम लोन ब्याज में 25 बेसिस पॉइंट (25 basis points) की बढ़ोतरी की है, जिसका मतलब है कि आपको अब ज्यादा पैसे भरने पड़ेंगे. अब आपके लोन का टेन्योर बढ़ सकता है या फिर आपकी होम लोन मंथली किस्त (EMI) भी बढ़ सकती है.
हालांकि, यह ब्याज सभी तरह के लोन पर नहीं लागू होगा, क्योंकि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने यह ब्याज अपने एक्सटर्नल बेंचमार्क लिंक्ड रेट (EBLR) और रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट (RLLR) में बढ़ोतरी की है, जिससे इन बेंचमार्क से जुड़े लोन वाले कस्टमर्स के लिए ही उधार लेने की लागत बढ़ेगी. एसबीआई की संशोधित ईबीएलआर-लिंक्ड ब्याज दरें 15 अक्टूबर, 2026 से प्रभावी हो चुकी हैं.
इसका प्रभाव बकाया मूलधन, लागू ब्याज दर और बाकी अवधि पर निर्भर करेगा. यहां तक कि 0.25 प्रतिशत अंकों की मामूली बढ़ोतरी भी लॉन्गटर्म लोन टर्म में चुकौती के बोझ को बढ़ा सकती है, इसलिए कर्ज लेने वाले व्यक्ति को अपने लोन का कैलकुलेशन करना बहुत जरूरी है.
अब कितना हुआ होम लोन का ब्याज?
नियमित होम लोन पर ब्याज दर अब 7.50% से 8.80% के बीच है, जबकि होम लोन मैक्सगेन की दरें 8% से 9.30% के बीच हैं. टॉप-अप लोन पर ब्याज दरें 8% से 10.75% के बीच हैं, जबकि टॉप-अप ओवरड्राफ्ट लोन की दरें 8.50% से 11.25% के बीच हैं.
EMI में कितनी होगी बढ़ोतरी?
बैंकबाजार के मुताबिक, 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी 30 लाख से 1 करोड़ रुपये तक के बकाया होम लोन को कैसे प्रभावित कर सकती है. यह मानते हुए कि ब्याज दर 8 फीसदी से बढ़कर 8.25 फीसदी हो जाती है और बाकी अवधि 20 साल है.
अगर किसी कर्जदार का बकाया लोन 50 लाख है, तो बाकी टर्म अनचेंज रहने पर मंथली ईएमआई में करीब 781 रुपये की बढ़ोतरी होगी. 1 करोड़ रुपये के लोन के लिए यह बढ़ोतरी करीब 1,563 रुपये प्रति माह होगी. यह कैलकुलेशन 20 साल के टर्म पर हैं और 8 फीसदी के ब्याज पर बेस्ड हैं.
ईएमआई बढ़ाएं या लोन टर्म?
ब्याज दरें बढ़ने पर, कर्जदार को बैंक की शर्तों के अधीन, अपनी मौजूदा EMI को बनाए रखते हुए चुकौती अवधि बढ़ाने का विकल्प दिया जा सकता है. ऑप्शनल के तौर पर, वे बाकी अवधि को अनचेंज रखते हुए अपनी EMI बढ़ा सकते हैं. मासिक किस्त को स्थिर रखने से मंथली कैश फ्लो में तत्काल राहत मिल सकती है, लेकिन लंबी चुकौती अवधि का मतलब आमतौर पर अधिक महीनों तक ब्याज चुकाना होता है. अगर आप वहन कर सकते हैं, तो किस्त बढ़ाने से अतिरिक्त ब्याज लागत को सीमित करने में मदद मिल सकती है.
ऋण लेने वालों को चुनाव करने से पहले अपनी मासिक आय, आवश्यक खर्च, आपातकालीन बचत और अन्य ऋण प्रतिबद्धताओं का आकलन करना चाहिए, जिनके पास पर्याप्त वित्तीय लचीलापन है, वे अधिक ईएमआई पर विचार कर सकते हैं, जबकि कैश की कमी का सामना कर रहे लोन लेने वालों को एसबीआई से उपलब्ध विकल्पों पर चर्चा करनी चाहिए.
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