
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अहम आदेश में कहा कि अगर मुस्लिम जोड़े (Muslim couple.) का तलाक होता है, तो दूल्हे को दुल्हन के माता-पिता की ओर से शादी के समय दिए गए तोहफे वापस करने होंगे। कोर्ट ने यह फैसला देते हुए कहा कि समाज में आज भी पितृसत्तात्मक भेदभाव मौजूद है। जस्टिस संजय करोल (Justice Sanjay Karol) और एन.के. सिंह (N.K. Singh) की बेंच ने कलकत्ता हाई कोर्ट (Calcutta High Court) के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें कहा गया था कि आदमी अपने ससुर की ओर से दिए गए तोहफे रख सकता है।
सुप्रीम कोर्ट का अहम आदेश
सर्वोच्च अदालत ने मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 1986 की एक धारा का हवाला देते हुए यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि भारत का संविधान सभी के लिए समानता का लक्ष्य रखता है, जो अभी तक पूरी तरह हासिल नहीं हुआ है। अदालतों को सामाजिक न्याय को ध्यान में रखकर फैसले सुनाने चाहिए।
जानें फैसले की बड़ी बातें
शीर्ष कोर्ट ने कहा कि 1986 का यह कानून तलाक के बाद मुस्लिम महिलाओं की गरिमा और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है। यह महिलाओं के आर्टिकल 21 के तहत अधिकारों से भी जुड़ा है। बेंच ने आगे कहा कि इस कानून की व्याख्या करते समय समानता, गरिमा और स्वायत्तता को प्राथमिकता देनी चाहिए।
क्या होगा असर
पीठ ने कहा कि यह महिलाओं के वास्तविक जीवन के अनुभवों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए, खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में, जहाँ आज भी पितृसत्तात्मक भेदभाव आम है। कोर्ट ने बताया कि इस कानून की धारा 3 के तहत, महिला को शादी से पहले, शादी के समय या शादी के बाद अपने रिश्तेदारों, दोस्तों, पति या पति के रिश्तेदारों या दोस्तों की ओर से दिए गए सभी संपत्तियों पर अधिकार मिलता है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved