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चारघाट पंचायत में घोटाला: जनपद सीईओ की मेहरबानी से बचे सरपंच ?

April 02, 2026

  • फर्जी बिलों से 91 हजार की हेराफेरी का मामला, जनपद सीईओ पर सरपंच को बचाने का आरोप

जबलपुर। जिले की ग्राम पंचायत चारघाट में शासकीय राशि के दुरुपयोग का गंभीर मामला उजागर हुआ है। शिकायतकर्ता मनोज अग्रवाल की शिकायत पर हुई जांच में सामने आया कि पंचायत में नियमों को ताक पर रखकर फर्जी बिलों के जरिए 91,156 रुपये की राशि का गबन किया गया। इस पूरे मामले में शिकायकतकर्ताओं ने जनपद सीईओ की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि सरपंच को इस प्रकरण से बचाया गया है।



  • जांच एडीईओ अमरेश गिरी और अनिल कुमार झारिया द्वारा की गई, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। रिपोर्ट के मुताबिक पंचायत में बिना किसी प्रस्ताव या टेंडर प्रक्रिया के मनमाने ढंग से वेंडर नियुक्त किए गए। न तो पंचायत बैठक में अनुमोदन लिया गया और न ही वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया।

    फर्जी बिल, असली भुगतान
    जांच में पाया गया कि अलग-अलग दुकानों के नाम से बिल लगाए गए, लेकिन हकीकत में कोई सामग्री खरीदी ही नहीं गई। संबंधित दुकानदारों से संपर्क करने पर उन्होंने साफ किया कि पंचायत द्वारा उनसे कोई सामान नहीं लिया गया। इसके बावजूद बिलों के आधार पर भुगतान कृष्णा प्रजापति और अमित जैन के खातों में ट्रांसफर कर दिया गया।

    रिकॉर्ड गायब, जवाब गोल
    पंचायत का वित्तीय रिकॉर्ड भी गंभीर लापरवाही का शिकार मिला। कई वर्षों की कैशबुक और बिल-बाउचर उपलब्ध नहीं कराए गए। वर्तमान सचिव सुधा नायर रिकॉर्ड प्रस्तुत करने में असफल रहीं, जबकि पूर्व सचिव रश्मि पासी द्वारा प्रभार सूची पहले ही सौंपी जा चुकी थी। जांच समिति को समय पर दस्तावेज न देना भी बड़ी अनियमितता मानी गई।

    सरपंच ने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा
    सरपंच केशर बाई ने बयान में कहा कि उन्हें भुगतान प्रक्रिया की कोई जानकारी नहीं है और सभी वित्तीय कार्य सचिव द्वारा किए जाते हैं। हालांकि, नियमों के अनुसार पंचायत प्रमुख की जिम्मेदारी भी तय होती है, जिससे उनकी भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।

    सूली और कड़ी कार्रवाई की तैयारी
    जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से 91,156 रुपये की राशि को गबन मानते हुए पूर्व सचिव रश्मि पासी से वसूली की सिफारिश की गई है। वहीं, वर्तमान सचिव सुधा नायर के खिलाफ भी लापरवाही और अनियमितताओं को लेकर कड़ी कार्रवाई प्रस्तावित है। अब यह मामला जिला पंचायत के पास अंतिम निर्णय के लिए पहुंच चुका है। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो पंचायतों में चल रहे ऐसे खेल पर लगाम लगाना मुश्किल हो सकता है।

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