
वैज्ञानिकों ने लाल सागर में 1989 से पड़े एक्सॉन वाल्डेज टैंकर से लगातार हो रहे तेल के रिसाव को गंभीरता से लेते हुए उसे जल्द हटाने का आदेश दिया है। वैज्ञानिकों ने चेताते हुए कहा है कि इस तरह के जहाज में लगभग 10 लाख बैरल तेल होता है, जो कि एक्सॉन में मौजूदा तेल का चार गुना है।
इसका तेजी से रिसाव पर्यावरण के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकता है। ‘फ्रंटियर्स इन मरीन साइंस’ पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में विश्लेषकों ने बताया है कि लाल सागर में पड़ा ‘सैफर’ नामक टैंकर एक फ्लोटिंग स्टोरेज और ऑफलोडिंग यूनिट (एफएसओ) है। यह आसपास बसी आबादी के लिए कई विनाशकारी परिणाम ला सकता है। जानकारी के मुताबिक, लाल सागर के तट से लगे आधा दर्जन देशों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए यह टैंकर खतरा बनता जा रहा है।
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