
तेहरान । पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत ने अपने व्यापारिक जहाजों (Merchant ships) की सुरक्षा के लिए कदम तेज कर दिए हैं। इसी क्रम में भारतीय नौसेना (Indian Navy) ने फारस की खाड़ी के आसपास अपने कई युद्धपोत (Warship) तैनात कर दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक इन युद्धपोतों को इस तरह तैयार रखा गया है कि जरूरत पड़ने पर वे भारत आने वाले व्यापारिक जहाजों को तुरंत सहायता दे सकें।
रिपोर्ट के अनुसार इस तैनाती का मुख्य उद्देश्य भारतीय जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच समुद्री मार्गों की निगरानी भी बढ़ा दी गई है।
इस बीच शनिवार को ईरान के अधिकारियों ने भारत की ओर जा रहे दो भारतीय ध्वज वाले एलपीजी जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दे दी। इन जहाजों में शिवालिक और नंदा देवी शामिल हैं। जहाज निगरानी वेबसाइट के अनुसार ‘शिवालिक’ फिलहाल ओमान के पास देखा गया था और इसके 21 मार्च तक अपने गंतव्य तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।
बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने शुक्रवार को फारस की खाड़ी क्षेत्र की समुद्री स्थिति और भारतीय जहाजों की सुरक्षा को लेकर उठाए गए कदमों की जानकारी दी। मंत्रालय के मुताबिक फारस की खाड़ी में 24 भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर 668 भारतीय नाविक कार्यरत हैं, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्व में तीन जहाजों पर 76 भारतीय नाविक मौजूद हैं।
सरकार ने बताया कि डीजी शिपिंग जहाज मालिकों, आरपीएसएल एजेंसियों और भारतीय मिशनों के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है। सभी जहाजों और चालक दल की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। 24 घंटे सक्रिय नियंत्रण कक्ष को अब तक 2,425 से अधिक कॉल और 4,441 ईमेल प्राप्त हो चुके हैं, जबकि 223 से ज्यादा फंसे भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी कराई जा चुकी है।
भारत में मोहम्मद फतहाली, जो ईरान के राजदूत हैं, ने कहा कि क्षेत्रीय संघर्ष के बावजूद ईरान भारत जाने वाले जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित मार्ग देता रहेगा। उन्होंने भारत और ईरान को पुराने मित्र बताते हुए कहा कि दोनों देशों के हित और भविष्य आपस में जुड़े हुए हैं।
वहीं भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि ईरान कभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना नहीं चाहता था। उन्होंने मौजूदा हालात के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि वैश्विक नेताओं को युद्ध रोकने के लिए दबाव बनाना चाहिए, क्योंकि बढ़ती तेल कीमतों का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है।
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