
इंदौर, नासेरा मंसूरी। उज्जैन श्री महाकाल महालोक में सिंहस्थ से पहले नई प्रतिमाएं लगने जा रही हैं। इसका जिम्मा मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम को मिला है। अब यहां कांसे (ब्रॉन्ज) और पत्थर (स्टोन) की प्रतिमाएं लगाई जाएंगी, जिसके लिए विभाग ने मूर्तिकारों की खोज शुरू कर दी है। नई प्रतिमाओं के निर्माण के बाद इन पर स्थायी कोटिंग लगाई जाएगी, जिससे कि ये हमेशा सुरक्षित रहेंगी और इन्हें कोई नुकसान भी नहीं होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 अक्टूबर 2022 को उज्जैन में बाबा महाकाल के प्रांगण में श्री महाकाल महालोक का लोकार्पण किया था। इसके बाद 2023 में आंधी-तूफान में सप्तऋषि की कई मूर्तियां टूट गई थीं। इससे सबक लेकर अब श्री महाकाल महालोक की 99 मूर्तियों को बदला जा रहा है। लगभग 57 करोड़ के टेंडर हुए हैं। सिंहस्थ से पहले ये काम पूरा कर लिया जाएगा। नई मूर्तियों का निर्माण कांसे और पत्थर से होगा, जिससे ये इतनी मजबूत हो जाएंगी कि इन्हें हजारों साल तक आंधी-तूफान और पानी से सुरक्षित रखा जा सकेगा। मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के अधिकारियों के मुताबिक 99 मूर्तियों में से 57 कांसे की और 42 मूर्तियां पत्थर से तैयार की जाएंगी। 20 फीट से छोटी सभी मूर्तियां पत्थर से बनेंगी और 20 फीट से बड़ी मूर्तियों का निर्माण कांसे से होगा। स्थायी कोटिंग से मूर्तियों के अंदर की धातु हमेशा सुरक्षित रहेगी। सभी मूर्तियों के पास फिलहाल लगे स्कैनर भी उसी तरह लगाए जाएंगे, जैसे अभी हैं। इन्हें स्कैन करते ही इन मूर्तियों की मुद्रा की जानकारी और कहानी सामने आ जाएगी।
मूर्तिकार मिलते ही शुरू होगा तेजी से काम
विभाग ने इसके लिए मूर्तिकारों को बुलवाने के लिए टेंडर किए हैं। जैसे ही मूर्तिकार मिलेंगे काम तेजी से शुरू हो जाएगा। जैसे-जैसे मूर्तियों का निर्माण होगा वैसे-वैसे इन्हें रिप्लेस कर लिया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक सिंहस्थ से पहले सभी प्रतिमाएं बदल दी जाएंगी। हालांकि विभाग पिछले साल भी एक बार टेंडर बुला चुका है। यह टेंडर दूसरी बार हुए हैं।
सप्तऋषियों की प्रतिमाएं हो रहीं तैयार
आंधी-तूफान में फाइबर से बनी सप्तऋषियों की प्रतिमाएं टूट गई थीं, जिसके बाद पत्थर से बनी प्रतिमाएं लग रही हैं। सप्तऋषियों की प्रतिमाओं का निर्माण अंतिम चरण में है। 5 प्रतिमाएं बनकर तैयार हैं और 2 पर तेजी से काम चल रहा है। इन्हें ओडिशा से आए अनुभवी कारीगर तैयार कर रहे हैं, जिनके परिवार पीढिय़ों से पत्थर की मूर्तियां बनाने का काम करते आ रहे हैं। मूर्तियां राजस्थान के बंशी पहाड़पुर के खास पत्थर से बनाई जा रही हैं, जो बेहद मजबूत और टिकाऊ माना जाता है। इनके साथ एक बड़ी शिव प्रतिमा भी बनाई जा रही है। करीब 15 कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।
कुछ ऐसा है महाकाल लोक
महाकाल मंदिर के पास श्री महाकाल महालोक है। इस परिसर को 2.87 हेक्टेयर (7.1 एकड़) से 47 हेक्टेयर (116 एकड़) तक विस्तारित किया गया है। इस परियोजना को भगवान शिव को समर्पित किया गया है। यहां मूर्तियों के अलावा 108 दिव्य स्तंभों की भव्य श्रृंखला, एक विशाल प्रवेश द्वार, मंदिर के चारों ओर नि:शुल्क घूमने का स्थान और शिव पुराण की कहानियां शामिल हैं। यह परियोजना उज्जैन में पर्यटन को बढ़ावा देने और इसे हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में से एक के रूप में स्थापित करने के लिए की गई थी। इसके निर्माण के बाद यहां धार्मिक पर्यटन में तेजी से बढ़ावा हुआ है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved