
बता दें कि कनाडा की जनसंख्या वृद्धि की गति में आए इस धीमेपन के पीछे का प्रमुख कारण कोरोना वायरस के चलते आप्रवासन पर प्रतिबंध रहा। दरअसल, इस वैश्विक महामारी के चलते देश की सीमाएं बंद रहीं और आप्रवासन गतिविधियां बहुत ही कम रहीं। कनाडा में साल 2020 में एक लाख 84 हजार 625 आप्रवासी दर्ज किए गए।
उल्लेखनीय है कि यह संख्या साल 2019 के मुकाबले लगभग आधी ही रही।
देश छोड़ कर गए ज्यादा, आए कम
इसके अलावा, पिछले साल देश छोड़ कर जाने वाले अस्थायी नागरिकों की संख्या आने वाले नागरिकों के मुकाबले काफी कम रही। इससे कनाडा को 86,535 लोगों का नुकसान हुआ। यह विदेशी निवासियों का सबसे बड़ा शुद्ध नुकसान है। इसमें कर्मचारी और छात्र-छात्राएं आदि शामिल होते हैं। बता दें कि कनाडा की जनसंख्या के साथ-साथ देश के समूचे आर्थिक विकास में भी आप्रवासन एक प्रमुख हिस्सा रखता है।
आप्रवासन है कनाडा की रीढ़ की हड्डी
उल्लेखनीय है कि पिछले पांच साल में, कनाडा की कुल जनसंख्या वृद्धि में आप्रवासन की तीन चौथाई से अधिक की हिस्सेदारी रही है। लेकिन, साल 2020 में इस आंकड़े में गिरावट दर्ज की गई। खास बात है कि आप्रवासन कनाडा की पूरी अर्थव्यवस्था के साथ-साथ यहां की हाउसिंग मार्केट से लेकर बैंकिंग सेवाओं तक को प्रभावित करता है। लेकिन, पिछले साल कोरोना वायरस संकट ने इसे बुरी तरह प्रभावित किया।
मौत के मामले में भी बन गया रिकॉर्ड
इसके साथ ही कनाडा में पिछले साल मृत्युओं की संख्या में भी रिकॉर्ड बढ़त देखी गई। मौत का यह आंकड़ा देश के इतिहास में पहली बार तीन लाख को पार कर गया। इसमें से हर 20 में से एक व्यक्ति की मौत कोरोना वायरस महामारी के संक्रमण की वजह से हुई। इसके अलावा जनसंख्या वृद्धि की प्राकृतिक दर (जन्म और मृत्यु में अंतर) भी घटकर 62,834 पर पहुंच गई। यह साल 1922 के बाद से देश में सबसे कम वृद्धि है।
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