
नई दिल्ली: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा कि 2014 में सोनिया गांधी ने उन्हें सीएम पद की शपथ लेने की तारीख तय करने को कहा था. क्योंकि उन्हें 58 विधायकों का समर्थन प्राप्त था. इसी बीच USA से राहुल गांधी का एक फोन पार्टी नेताओं के पास आया और स्थिति पूरी तरह बदल गई. एक तरह से राहुल गांधी ने उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनने दिया था.
सरमा ने दावा किया कि यह उनके एक बहुत बड़ा झटका था. मंगलवार को विधानसभा में कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने यह दावा किया है. दरअसल 2011 में विधानसभा चुनावों के बाद असम कांग्रेस में अंसतोष देखा गया था. जब विधायकों के एक गुट ने मौजूदा तरुण गोगोई की जगह सरमा को मुख्यमंत्री के तौर पर समर्थन दिया था. इस पूरे मामले को लेकर हिमंत ने मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि उस समय उन्हें सोनिया गांधी मैडम का फोन आया और उन्होंने ‘मुझसे कहा कि CM पद की शपथ को लेकर तारीख तय करो. मैंने उनसे कहा कि मैं जून (2014) में कामाख्या मंदिर में अंबुबाची मेले के बाद शपथ लूंगा.’
हिमंत का दावा है कि इसी बीच उस समय राहुल गांधी के कॉल करने के बाद स्थिति बदल गई. तब मुझे दुख हुआ था, इसके बाद उन्होंने कांग्रेस पार्टी छोड़ने का मन बना लिया. उन्होंने आगे कहा कि लेकिन अब मेरा मानना है कि किसी की जिंदगी में जो कुछ भी होता है, वह अच्छे के लिए होता है और भगवान ने मुझे उनसे कहीं ज्यादा बीजेपी ने दिया है, जितना मुझे कांग्रेस में रहने पर शायद नहीं मिलता. उन्होंने 2015 में BJP में शामिल होने के लिए पार्टी छोड़ दी और विधानसभा चुनावों में भगवा पार्टी की पहली जीत सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई.
हिमंत ने कहा कि वह 2021 से असम के मुख्यमंत्री हैं. वह बीजेपी के सीएम के तौर पर पूरे दिल से असम और सनातन धर्म दोनों की सेवा करने का मौका मिला, जो कांग्रेस में रहने पर मुमकिन नहीं होता. उन्होंने कहा कि अगर वह भविष्य में कोई किताब लिखेंगे तो इस पूरे घटनाक्रम को विस्तार से बताएंगे. जिससे लोगों को कांग्रेस के बारे में सही जानकारी मिल पाए.
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