
जोहानसबर्ग। दक्षिण अफ्रीका (South Africa) के डरबन के उत्तर में स्थित रेडक्लिफ इलाके (Redcliffe Area) में बीते शुक्रवार दोपहर को अहोबिलम टेंपल ऑफ प्रोटेक्शन (Ahobilam Temple of Protection) के निर्माण स्थल पर हुए भीषण हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। वहीं अभी भी कई लोगों के मलबे में फंसे होने की संभावना जताई जा रही है। मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, राहत और बचाव कर्मी पिछले दो दिनों से मलबे में दबे एक पांचवें शव को निकालने की कोशिश कर रहे थे।
हालांकि, शनिवार दोपहर खराब मौसम के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन को रोकना पड़ा। तेज बारिश और खराब हालात के चलते मलबे में काम करना बेहद मुश्किल हो गया। बता दें कि पहले मीडिया रिपोर्टस में बताया गया था कि इस हादसे में दो लोगों की मौत हुई है और कई लोग मलबे में दबे हैं। ऐसे में जब ताजा अपडेट सामने आया तब इस बात की पुष्टि की गई कि इस हादसे में मरने वालों की संख्या अब बढ़कर चार हो गई है।
बता दें कि मंदिर एक ढलान वाली पहाड़ी पर बनाया जा रहा था और इसमें चट्टानों का इस्तेमाल किया गया था, जिन्हें भारत से लाया गया और निर्माण स्थल पर खुदाई की गई थी। मंदिर का डिजाइन गुफा जैसा था और इसे भगवान नरसिंहदेव की दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमाओं में से एक के लिए बनाया जा रहा था। हादसे में मारे गए लोगों में से एक 52 वर्षीय भारतीय मूल के विक्की जैरज पांडे हैं, जो मंदिर ट्रस्ट के कार्यकारी सदस्य और निर्माण परियोजना के प्रबंधक थे। पांडे पिछले दो साल से मंदिर निर्माण में सक्रिय रूप से शामिल थे। मामले में रिएक्शन यूनिट साउथ अफ्रीका के प्रवक्ता प्रेम बलराम ने जानकारी देते हुए बताया कि फिलहाल यह पुष्टि नहीं हो पाई है कि मलबे के नीचे और लोग फंसे हुए हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि हालात सामान्य होने के बाद फिर से तलाशी अभियान शुरू किया जाएगा।
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